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Ram Mandir Donation Scam: अभिषेक अनिल वशिष्ठ का प्रशासन पर बड़ा हमला—”आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं!”

अयोध्या: राम मंदिर के गर्भगृह से चढ़ावा चोरी होने की खबर ने पूरे देश के राम भक्तों को स्तब्ध कर दिया है। इस संवेदनशील और गंभीर मुद्दे पर वशिष्ठ मीडिया हाउस के संस्थापक अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने मोर्चा खोलते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे महज चोरी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था पर सीधा प्रहार बताया है।

अभिषेक अनिल वशिष्ठ के तीखे सवाल:

  • “भगवान के घर में सेंध, क्या हम खामोश रहें?”अभिषेक वशिष्ठ ने बेहद भावुक और कड़े लहजे में कहा, “हम राम को अपने पिता के रूप में पूजते हैं। जब हमारे आराध्य, हमारे पिता के ही घर से चोरी हो जाए, तो क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें? यह सवाल हर उस सनातनी का है जिसकी भावनाएं आज आहत हुई हैं।”
  • “जिम्मेदारी तय हो और हो सख्त कार्रवाई”उन्होंने मांग की कि जिस ट्रस्ट और जिन पदाधिकारियों को मंदिर की देखरेख और सुरक्षा का दायित्व सौंपा गया था, सबसे पहले उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। वशिष्ठ ने दो टूक कहा, “जिनकी निगरानी में यह चोरी हुई है, उन्हें तत्काल प्रभाव से न्यायिक हिरासत में लेकर पूछताछ की जानी चाहिए। आखिर उनके रहते मंदिर सुरक्षित क्यों नहीं है?”
  • “जांच के नाम पर मज़ाक और सरकारों की चुप्पी”उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “जांच के नाम पर जो तमाशा किया जा रहा है, वह हैरान करने वाला है। वहीं, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की चुप्पी यह संकेत दे रही है कि उन्हें लगता है भक्त शोर मचाकर सब भूल जाएंगे। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि जब आस्था पर चोट लगती है, तो भक्त कभी माफ नहीं करते।”
  • “ध्रुवीकरण की कोशिशों पर लगाम”अभिषेक वशिष्ठ ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस मुद्दे को भी हिंदू-मुस्लिम का रंग देने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा आस्था का है, राजनीति का नहीं। इसे किसी भी हाल में राजनीतिक एजेंडे की बलि नहीं चढ़ने दिया जाएगा।

वशिष्ठ मीडिया हाउस का संकल्प:

अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने जोर देकर कहा कि वे किसी को बिना ठोस सबूत के दोषी नहीं ठहरा रहे, लेकिन ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करने के लिए एक निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच अनिवार्य है। वशिष्ठ मीडिया हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आवाज़ बुलंद रहेगी।

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