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BREAKING NEWS: मालवाणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के कथित ‘तानाशाह’ चेयरमैन की मनमानी पर चला म्हाडा का चाबुक!

⚖️ वशिष्ठ मीडिया हाउस के चेयरमैन एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी व प्रकाशक अभिषेक वशिष्ठ की बड़ी जीत: उप-निबंधक बीएस कटरे ने सोसाइटी की शिकायत की खारिज, तानाशाही का हुआ अंत!

मुंबई (विशेष संवाददाता): मालवाणी स्थित स्वप्नपूर्ति कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में पिछले 15 वर्षों से जमे कथित ‘तानाशाह’ चेयरमैन बालासाहेब भगत और उनकी कार्यशैली को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। वशिष्ठ मीडिया हाउस के चेयरमैन एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी व प्रकाशक अभिषेक वशिष्ठ की लंबे समय से जारी कानूनी और सामाजिक लड़ाई के बाद अंततः सच्चाई और कानून की जीत हुई है।

म्हाडा (MHADA) के उप-निबंधक बी. एस. कटरे ने महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1960 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोसाइटी प्रशासन द्वारा अभिषेक वशिष्ठ और श्रीमती स्मिता अभिषेक वशिष्ठ के खिलाफ दायर की गई रिकवरी एप्लीकेशन को पूर्णतः नामंजूर (खारिज) कर दिया है।

🏛️ म्हाडा उप-निबंधक का आधिकारिक आदेश (Official Order)

मुंबई हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के उप-निबंधक (कोऑपरेटिव सोसाइटीज़, मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स) बी. एस. कटरे द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में स्पष्ट कहा गया है:

“महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1960 के सेक्शन 154(2) के तहत मुझे मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मैं, बी. एस. कटरे (डिप्टी रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़, मुंबई वेस्टर्न सबर्ब्स, म्हाडा), मालवाणी स्वप्नपूर्ति कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड (गायकवाड़ नगर, मालवाणी, मलाड वेस्ट) द्वारा रेस्पोंडेंट श्रीमती स्मिता अभिषेक वशिष्ठ और श्री अभिषेक अनिल वशिष्ठ के खिलाफ़ फाइल की गई रिकवरी एप्लीकेशन को खारिज करता हूँ।”

(यह आदेश 24 जुलाई 2026 को हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर के साथ जारी किया गया है।)

🚨 क्या है पूरा मामला? जानिए तानाशाही और खून्नस के बड़े कारनामे:

  1. आपातकालीन (Emergency) रास्ते पर अवैध पार्किंग वसूली: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर फेडरेशन बनाकर विकास के नाम पर म्हाडा के आपातकालीन (एमरजेंसी) रास्ते को अवैध पार्किंग में तब्दील कर दिया गया था। जनता के सुरक्षा मार्ग से अवैध पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा था। जब अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने इसका विरोध किया, तो चेयरमैन ने अहंकारी रवैया अपनाते हुए कहा कि “मैं सोसाइटी और फेडरेशन का चेयरमैन हूँ, जो चाहूँगा वही करूँगा।”
  2. बुलडोजर की कार्रवाई और ₹1,08,000 का जुर्माना:अभिषेक अनिल वशिष्ठ द्वारा ‘मुंबई क्षेत्र निर्माण गोरेगांव’ में की गई आधिकारिक शिकायत के बाद म्हाडा प्रशासन हरकत में आया। म्हाडा ने 24 घंटे के भीतर अवैध निर्माण बंद करने का नोटिस जारी किया, सोसाइटी परिसर के अंदर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के फेडरेशन पर ₹1,08,000 की भारी पेनल्टी (जुर्माना) ठोक दी।
  3. फेडरेशन अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की खून्नस में बनाया दबाव, पर रहे नाकाम:फेडरेशन के अध्यक्ष और सोसाइटी चेयरमैन बालासाहेब भगत के खिलाफ अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने जो यह बड़ी बुलडोजर और जुर्माने की कार्रवाई करवाई थी, उसी की खून्नस (बदले की भावना) में चेयरमैन ने अभिषेक वशिष्ठ पर मेंटेनेंस के ज़रिए मानसिक और आर्थिक दबाव बनाने की पूरी कोशिश की। लेकिन उनकी यह साजिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई:
    • बिना गाड़ी खड़ी किए फर्जी कार पार्किंग का चार्ज जोड़ दिया गया।
    • बैक-डेट (पुरानी तारीखों) से अवैध पेनल्टी थोप दी गई।
    • घर खरीदारी के समय 2019 तक का पूरा मेंटेनेंस चुकता होने की स्लिप (रसीद) दिखाने के बावजूद, पुराने ₹3,000 और फर्जी ₹20,000 का बकाया दिखाया गया।
    • जब मालवाणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के अध्यक्ष ज़िद में म्हाडा जाने की तैयारी करने लगे, तो कानूनी कार्रवाई के डर से उन्होंने पहले ही बैक-डेट की ₹20,000 की पेनल्टी और जुर्माना चुपचाप हटा दिया।
    • इसके बाद कार पार्किंग के मुद्दे पर उप-निबंधक को गुमराह करके दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन उप-निबंधक बी. एस. कटरे गुमराह नहीं हुए और उन्होंने सच्चाई का साथ दिया।
  4. सोसाइटी के पैसों की बर्बादी:अभिषेक वशिष्ठ ने पहले ही चेताया था कि बेबुनियाद केस लड़कर वकील की ₹60,000 से ₹70,000 की फीस सोसाइटी के फंड (सदस्यों के खून-पसीने की कमाई) से बर्बाद न की जाए। लेकिन चेयरमैन ने अपनी व्यक्तिगत ज़िद और खून्नस में आकर सोसाइटी का पैसा उड़ाया।
  5. अपनी गर्दन बचाने के लिए दूसरों पर डाला खर्चा:जब म्हाडा में केस हार गए और सोसाइटी के सदस्य सवाल पूछने लगे, तो चेयरमैन बालासाहेब भगत ने अपनी जान बचाने के लिए वकील की फीस का खर्च चालाकी से अभिषेक वशिष्ठ के खाते में डालने की कोशिश की।

⚖️ अब लीगल टीम का अगला वार: “वकील की फीस चेयरमैन की जेब से वसूलेंगे!”

इस ऐतिहासिक जीत के बाद अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने अपनी लीगल टीम से परामर्श किया है।

अभिषेक वशिष्ठ का कड़ा संदेश:

“हमने शुरू से ही कानून और सच का साथ दिया। चेयरमैन की व्यक्तिगत खून्नस, ज़िद और अहंकार के कारण जो वकील की फीस (₹60,000 – ₹70,000) बर्बाद हुई है, उसका भुगतान सोसाइटी का आम सदस्य क्यों करे? हमारी लीगल टीम अब चेयरमैन बालासाहेब भगत और सचिव मिलिंद जोशी को लीगल नोटिस भेज रही है। उन्हें यह वकीलों का खर्च अपनी निजी जेब (पॉकेट) से भरना पड़ेगा, सोसाइटी के फंड से नहीं!”

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