मुंबई: मालवानी में म्हाडा (मुंबई क्षेत्र गृहनिर्माण व क्षेत्रविकास मंडळ, गोरेगांव) के अधिकारियों की लापरवाही अब सिर्फ कागजी हेराफेरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम जनता की जिंदगी के लिए सीधी मौत का जाल बन चुकी है। म्हाडा के आपातकालीन रास्ते (Emergency Exit) पर अब अवैध कब्जा इस कदर बढ़ चुका है कि पूरा रास्ता ‘अवैध ऑटो स्टैंड’ और ‘पार्किंग लॉट’ में तब्दील हो चुका है।

हालत यह है कि अगर किसी इमारत में आग लग जाए या कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए, तो दमकल (Fire Brigade) या एम्बुलेंस का अंदर घुसना तो दूर, एक व्यक्ति का पैदल निकलना भी दूभर है। फेडरेशन बंद हो चुका है, उसके सभी पदाधिकारी इस्तीफा देकर हट चुके हैं, और एक सोसाइटी ने तो फेडरेशन से अपना नाम तक वापस खींच लिया है। लेकिन इसके बावजूद गोरेगांव म्हाडा कार्यालय के अधिकारियों पर सवालिया निशान उठना लाजिमी है, जो अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुंह मोड़े बैठे हैं।
1. 1. 8 महीने से ‘कल जारी करेंगे’ का झूंठा नाटक और मीडिया को गुमराह करने की साजिश
म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे पिछले कई महीनों से एक ही रटा-रटाया बयान दे रहे हैं कि “सीनियर आने ही वाले हैं और लेटर जारी हो जाएगा।” लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी यह लेटर किसी के सामने नहीं आया।
जब भी कोई सवाल पूछता है, तो ‘सीनियर के साइन’ का बहाना बनाकर केवल टालमटोल करने और मीडिया को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह उठता है कि:
- आखिर 8 महीने से मालवानी पुलिस चौकी और ट्रैफिक विभाग को भेजा जाने वाला यह लेटर म्हाडा के किस कोने में अदृश्य हो गया है?
- रोहित शिंदे के वे सीनियर संतोष कांबले किस अज्ञात लोक में रहते हैं, जिनका साइन 8 महीनों में एक साधारण से कागज पर नहीं उतर सका?
- क्या ‘सीनियर आएंगे और साइन करेंगे’ सिर्फ मीडिया और जनता को गुमराह करने का एक बनावटी जरिया है?
2. ‘वशिष्ठ वाणी’ पर फूटा आक्रोशित जनता का गुस्सा
इलाके के बेबस और डरे हुए लोग लगातार ‘वशिष्ठ वाणी’ को वीडियो, फोटो और मैसेज भेजकर अपनी आपबीती सुना रहे हैं। जनता का एक ही सीधा सवाल है:
“हमारे घर के बाहर से ये अवैध गाड़ियां कब हटेंगी? क्या म्हाडा के अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी और लाशों के ढेर का इंतजार कर रहे हैं?”
लेकिन म्हाडा के इन बेपरवाह अफसरों की हालत यह है कि मालवानी पुलिस चौकी या कांदिवली ट्रैफिक विभाग को एक मामूली सा लेटर लिखने में भी इनके हाथ-पांव फूल रहे हैं।
3. ’एमएलए फंड’ का खौफ और कुर्सी बचाने की होड़

15 साल पुराने खंडहर वॉटर टैंक पर ओम सिद्धि विनायक सोसाइटी द्वारा किए गए अवैध निर्माण पर म्हाडा अधिकारी इसलिए खामोश हैं क्योंकि उसमें स्थानीय एमएलए (MLA) का फंड लगा है। इसके अलावा ‘डॉक्टर अब्दुल कलाम फेडरेशन’ पर 1 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना ठोकने के बाद भी अध्यक्ष पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराने में म्हाडा के पसीने छूट रहे हैं।
मीडिया में खबर आने के बाद डर के मारे अब इस वाटर टैंक पर डांस तो हमेशा के लिए रोक दिया गया, लेकिन सवाल यह है कि रोहित शिंदे और संतोष कांबले ने इस अवैध निर्माण पर आज तक कोई कारण बताओ नोटिस तक जारी क्यों नहीं किया?
- डर का असली कारण: इस निर्माण में स्थानीय एमएलए (MLA) का फंड लगा है।
- अधिकारियों का गणित: इन अफसरों को अच्छी तरह मालूम है कि मीडिया कितनी भी खबरें चला ले या जनता कोर्ट चली जाए, ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? तबादला (Transfer) ही तो होगा! नौकरी तो जानी नहीं है!
- लेकिन अगर एमएलए साहब के खिलाफ उंगली उठाई, तो कुर्सी का ही ‘तबादला’ हो जाएगा! इसलिए मीडिया और कानून दोनों से बेफिक्र ये अफसर नेताजी के डर से हाथ बांधे खड़े हैं।
4. ‘हमने जगह दे दी, अब तुम जानो!’— संतोष कांबले
अधिकारियों का रवैया साफ बयां करता है कि “जब हमने जगह दे दी, तो अब जनता मरे या जिये, हम क्यों बीच में आएं?”
आपातकालीन रास्ते पर दिन-रात गाड़ियां खड़ी रहती हैं। अगर कल को वहां कोई आगजनी या मेडिकल इमरजेंसी हो जाए, तो फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस का पहुंचना नामुमकिन है। लेकिन कोर्ट के समन के बाद भी टस से मस न होने वाले संतोष कांबले और रोहित शिंदे को किसी हादसे से कोई फर्क नहीं पड़ता।
जनता की सीधी मांग:
अगर संतोष कांबले साहब अपनी ‘पिकनिक’ से वापस आ गए हों और रोहित शिंदे साहब को 14 दिसंबर को कोर्ट में दिए जाने वाले जवाब का थोड़ा भी होश हो, तो मेहरबानी करके उस ‘अदृश्य लेटर’ को ढूंढकर मालवानी पुलिस चौकी भेज दें—इससे पहले कि आपकी इस लाचारी की वजह से किसी बेगुनाह की जान चली जाए!













