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मलाड वेस्ट में फुटपाथों पर कब्ज़ा, सड़क पर चलने को मजबूर लोग

चारकोप सिग्नल से लिंक रोड तक अव्यवस्था, BMC और RTO की कार्यप्रणाली पर सवाल

मुंबई: मलाड वेस्ट के चारकोप सिग्नल और आसपास के इलाकों में फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग ने आम नागरिकों की परेशानी बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फुटपाथ, जो पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए हैं, आज कई जगहों पर अस्थायी दुकानों और वाहनों के कब्ज़े में दिखाई देते हैं।

चारकोप सिग्नल के पास कई स्थानों पर प्लास्टिक तंबू लगाकर पौधों का व्यापार, हेलमेट बेचने वाले और खिलौने बेचने वाले फुटपाथ पर दुकानें लगाए बैठे हैं। इसके कारण पैदल चलने वालों को फुटपाथ छोड़कर सड़क से गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।


नियम होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?

महाराष्ट्र सरकार के नियमों के अनुसार फुटपाथ पर स्थायी या अस्थायी तरीके से व्यापार करना प्रतिबंधित है, और इस प्रकार के अतिक्रमण को हटाने की जिम्मेदारी मुंबई महानगरपालिका (BMC) की होती है।
लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

कुछ लोगों का आरोप है कि जब भी कार्रवाई की संभावना होती है, तो संबंधित लोगों को पहले ही सूचना मिल जाती है, जिसके कारण वे अस्थायी रूप से वहां से हट जाते हैं और बाद में फिर वही स्थिति बन जाती है।

RTO और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी सवाल

मलाड वेस्ट के लिंक रोड क्षेत्र में जैन सबकुछ फूड प्लाजा और कुछ कार शोरूमों के बाहर फुटपाथ पर वाहन खड़े होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग नियमित कार्रवाई करें तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

“यह कैसा विकास?”

नागरिकों का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में यदि फुटपाथ पर चलना भी सुरक्षित न रहे, तो यह चिंता का विषय है। उनका सवाल है कि शहर में विकास की बात तो की जाती है, लेकिन यदि फुटपाथ ही अतिक्रमण से मुक्त नहीं हैं, तो इसे किस तरह का विकास कहा जाएगा।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि शिकायतों के बावजूद अधिकारी कार्रवाई नहीं करते, तो केवल स्थानांतरण (ट्रांसफर) की बजाय उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए।

सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, तो शहर की स्थिति काफी हद तक सुधर सकती है।

उनका मानना है कि जिस दिन फुटपाथों को अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से मुक्त कराने के लिए नियमित और निष्पक्ष कार्रवाई शुरू होगी, उस दिन मुंबई की सड़कों और फुटपाथों की तस्वीर काफी अलग दिखाई देगी।

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