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वशिष्ठ वाणी के सवालों से डरे ‘अधिकारी’! “डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी ने मीडिया से बात करने से मना किया है”: कलेक्ट्रेट अधिकारी उमेश चौधरी

मुंबई (विशेष प्रतिनिधि): मालाड (पश्चिम) के दाणापाणी, एरंगळ विलेज स्थित बुल्लर गार्डन, योगाश्रम में बुनियादी रास्ते (राइट टू वे) के लिए भटक रही पीड़ित महिला नेहा निलेश वालावलकर के मामले में नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। प्रशासनिक भ्रष्टाचार और दबंगों को संरक्षण देने का जो खेल पर्दे के पीछे चल रहा था, वह अब खुद कलेक्ट्रेट अधिकारी की जुबान से सरेआम उजागर हो चुका है।

जब पीड़ित महिला ने मौके पर मौजूद अधिकारी उमेश चौधरी से कहा कि— “आप इस गंभीर विषय पर वशिष्ठ वाणी के पब्लिशर से बात कर लीजिए,” तो कानूनी कार्रवाई और लीगल नोटिस के डर से अधिकारी महोदय की हालत खराब हो गई। कैमरे और जन-अदालत के डर से कांपते अधिकारी उमेश चौधरी ने ऑन-रिकॉर्ड कबूल किया कि:

“हमें डिप्टी कलेक्टर (उपजिलाधिकारी) विनायक पाडवी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि वशिष्ठ वाणी मीडिया की टीम से कोई बात नहीं करेगा!”

वशिष्ठ वाणी की लीगल नोटिस से सहमे अधिकारी, सवालों से भागने का रास्ता ढूंढा

आखिर डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी और अधिकारी उमेश चौधरी को मीडिया के कैमरों और सवालों से इतना डर क्यों है? जवाब साफ है— वशिष्ठ वाणी की लीगल टीम द्वारा भेजे गए कड़े नोटिस ने इन अधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी है।

जब अधिकारी कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय, खुलेआम अवैध कब्जाधारियों और दबंगों का साथ दे रहे हों, तो उनमें वशिष्ठ वाणी के तीखे और सुलगते सवालों का सामना करने की हिम्मत कैसे होगी? मीडिया से दूरी बनाने का यह तानाशाही फरमान सीधे तौर पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज को दबाने और अपनी काली करतूतों पर पर्दा डालने की एक नाकाम कोशिश है।

पीड़ित महिला को बेसहारा छोड़, कब्जाधारियों के रक्षक बने अधिकारी!

एक तरफ पीड़ित महिला पिछले कई महीनों से अपने ही घर से बाहर निकलने के बुनियादी हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है, जहां स्थानीय दबंगों ने मुख्य रास्ते के बीचों-बीच अवैध दीवार खड़ी कर रास्ता ‘लॉक’ कर दिया है।

दूसरी तरफ, कलेक्ट्रेट से आए ये जिम्मेदार अधिकारी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ बुल्डोजर चलाने या कार्रवाई करने के बजाय:

  • पीड़ित महिला को ही धमका रहे हैं।
  • सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाकर पीछे के दरवाजे से एक ऐसा संकरा रास्ता दे रहे हैं जिससे इंसान का निकलना भी दूभर है।
  • और जब मीडिया सच्चाई दिखाने पहुंचती है, तो ‘डिप्टी कलेक्टर का आदेश है’ कहकर मुंह छुपाकर भाग रहे हैं।

जनता की अदालत में वशिष्ठ वाणी के सुलगते सवाल:

  • डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी, जनता के टैक्स से वेतन पाने वाले अधिकारी मीडिया को जवाब देने से क्यों कतरा रहे हैं? क्या कलेक्ट्रेट कार्यालय अब दबंगों की निजी जागीर बन चुका है?
  • क्या मुंबई में अधिकारियों को न तो कानून का डर बचा है और न ही अपनी वर्दी की शर्म?
  • जिस अधिकारी उमेश चौधरी ने पीड़िता को सरेआम “घर तोड़ देने” की धमकी दी, उस पर जिला कलेक्टर और मुंबई पुलिस कमिश्नर कब संज्ञान लेंगे?

मुंबई की जनता अब इन भ्रष्ट और तानाशाह अधिकारियों का असली चेहरा देख चुकी है। वशिष्ठ वाणी इस तानाशाही के खिलाफ पीछे हटने वाली नहीं है। जब तक पीड़ित महिला नेहा निलेश वालावलकर को उनका मुख्य रास्ता नहीं मिल जाता और इन दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, यह लड़ाई जारी रहेगी।

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