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BMC की लापरवाही: मानसून की पहली बारिश में ही सड़कों का बुरा हाल

मानसून आते ही बेनकाब हुआ BMC का खोखला दावा; सड़कों पर ‘मौत के गड्ढे’, अधिकारी खामोश!

मुंबई: क्या मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारियों में थोड़ी भी शर्म बाकी है? यह सवाल आज हर उस मुंबईकर के मन में है जो सड़कों पर जान जोखिम में डालकर चल रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ ने बीते 20 जून 2026 को अंधेरी (पश्चिम) के लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स और मिलत नगर सर्कल स्थित कैफे कॉफी डे (CCD) के पास की सड़कों के खतरनाक गड्ढों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था, ताकि प्रशासन समय रहते चेत जाए। लेकिन आज 26 जून है—पूरे 6 दिन बीत चुके हैं—और स्थिति जस की तस बनी हुई है।

मानसून की दस्तक और ‘गड्ढों’ का नर्क

मुंबई में मानसून ने दस्तक दे दी है, और पहली ही बरसात ने BMC के दावों की पोल खोल दी है। सड़कों पर बने वही गड्ढे अब पानी से लबालब भरे हुए हैं। इन गड्ढों ने न केवल यातायात को ठप कर दिया है, बल्कि ये किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे रहे हैं। वाहन चालक और पैदल चलने वाले नागरिक इन जलमग्न गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन BMC के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।

क्यों सुध नहीं लेते जिम्मेदार अधिकारी?

हमने 20 जून को अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर चेताया था कि इन गड्ढों को जल्द से जल्द भरा जाए। सवाल यह है कि:

  • क्या शिकायतें सिर्फ कागजों पर दर्ज करने के लिए होती हैं?
  • क्या BMC का बजट सिर्फ कागजों पर ही खर्च होता है, सड़क पर नहीं?
  • क्या जनता की जान की कोई कीमत नहीं है?

ऐसा लगता है कि BMC के लापरवाह अधिकारियों ने मान लिया है कि मानसून के दौरान मुंबई की बदहाली एक ‘सामान्य’ प्रक्रिया है। जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करना अब इन अधिकारियों की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।

क्या अब कोई जागेगा?

‘वशिष्ठ वाणी’ के माध्यम से हम फिर से प्रशासन को चेतावनी देते हैं। यह गड्ढा सिर्फ एक गड्ढा नहीं है, यह BMC की प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत है। अगर समय रहते इसे ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में होने वाली किसी भी बड़ी दुर्घटना का सीधा जिम्मेदार केवल BMC प्रशासन होगा।

मुंबईकर जागें! अब चुप बैठने का समय नहीं है। जब तक हम जवाब नहीं मांगेंगे, ये लापरवाह अधिकारी कभी नहीं सुधरेंगे।

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