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मिठ चौकी ब्रिज: BMC की ‘भक्ति’ या डर? हवा में झूलता विधायक का बैनर बना खतरे की घंटी!

हटाने के बजाय ‘उल्टे’ बैनर को सीधा करने में जुटा प्रशासन; क्या MLA असलम शेख के डर से नियम भूले अधिकारी?

मुंबई: मालाड (पश्चिम) का नवनिर्मित मिठ चौकी सिग्नल ब्रिज इन दिनों विकास के लिए नहीं, बल्कि BMC अधिकारियों की राजनीतिक गुलामी के लिए चर्चा में है। 25 अप्रैल 2026 से ब्रिज के ऊपर विधायक असलम शेख की तस्वीर वाला एक बड़ा राजनीतिक बैनर लगा हुआ है। ताज्जुब की बात यह है कि हवा के झोंकों से यह बैनर कई बार उल्टा हो जाता है, लेकिन BMC के अधिकारी इसे हटाने की हिम्मत दिखाने के बजाय इसे वापस ‘सीधा’ करने में अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं।

हादसे को दावत देता ‘झूलता’ बैनर

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह बैनर अब आधा फट चुका है और ब्रिज की रेलिंग से खतरनाक तरीके से लटक रहा है। तेज हवा चलने पर यह किसी भी समय नीचे चल रहे वाहनों या पैदल यात्रियों पर गिर सकता है। यदि कोई बड़ा हादसा होता है, तो क्या BMC इसकी जिम्मेदारी लेगी? या फिर विधायक साहब का फोटो होने के कारण नियमों को ताक पर रख दिया गया है?

क्या ब्रिज विज्ञापन के लिए बना है?

करोड़ों की लागत से जनता की सुविधा के लिए बनाए गए इस ब्रिज को अब राजनीतिक प्रचार का अड्डा बना दिया गया है। कायदे से सार्वजनिक संपत्तियों पर बिना अनुमति बैनर लगाना अवैध है, लेकिन यहाँ प्रशासन की ‘दोस्ती’ कहें या ‘खौफ’, अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं।

अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि बैनर उल्टा लटका हुआ है। नागरिकों का आरोप है कि BMC के बीट ऑफिसर और विज्ञापन विभाग को इसकी जानकारी है, लेकिन ‘साहब’ बुरा न मान जाएं, इसलिए इसे हटाया नहीं जा रहा है। क्या बी.एम.सी. के लिए आम जनता की सुरक्षा से बढ़कर किसी नेता की नाराजगी है?

वशिष्ठ वाणी का सवाल: क्या BMC कमिश्नर इस मामले का संज्ञान लेंगे? या फिर जनता इसी तरह झूलते हुए बैनरों के साये में चलने को मजबूर रहेगी?

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