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मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी विवाद: म्हाडा अधिकारी बी.एस. कटरे की भूमिका पर सवाल, अध्यक्ष पर गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?

मुंबई | वशिष्ठ वाणी | मालवणी से विशेष रिपोर्ट

मालवणी के सामना नगर स्थित स्वप्नपूर्ति सोसायटी से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोसायटी के अध्यक्ष और म्हाडा के उपनिबंधक कार्यालय के अधिकारी बी.एस. कटरे की भूमिका को लेकर स्थानीय निवासियों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं।

निवासियों का आरोप है कि सोसायटी से जुड़े कई मामलों में शिकायतें और जांच के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बी.एस. कटरे पर पहले से लगे आरोपों के बीच उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि म्हाडा के अधिकारी बी.एस. कटरे पर पहले से ही कई आरोप लग चुके हैं और मामला न्यायालय में भी विचाराधीन बताया जा रहा है। इसके बावजूद उन्हें पद से नहीं हटाया गया है।

निवासियों का आरोप है कि सोसायटी से जुड़े मामलों में अक्सर सुनवाई की तारीख दी जाती है, लेकिन कई बार संबंधित अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाती।

स्वप्नपूर्ति सोसायटी के अध्यक्ष पर लंबे समय से आरोप

सामना नगर के निवासियों के अनुसार मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी के अध्यक्ष पिछले लगभग 15 वर्षों से पद पर बने हुए हैं
आरोप है कि इस दौरान सोसायटी के भीतर कई अनियमितताएं और विवाद सामने आए, लेकिन उनके खिलाफ कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी।

म्हाडा की जांच में क्या सामने आया

सूत्रों के अनुसार, सोसायटी से जुड़ी शिकायतों के बाद म्हाडा द्वारा जांच के लिए अधिकारी महाजन को नियुक्त किया गया था
बताया जाता है कि जांच के दौरान कुछ मामलों में सोसायटी प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए गए और अध्यक्ष को जिम्मेदार ठहराया गया।

इसके बाद मामला उपनिबंधक कार्यालय में चला, जहां कई महीनों तक सुनवाई भी हुई।
हालांकि अंतिम निर्णय में सोसायटी को कई मामलों से राहत दिए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद स्थानीय लोगों के बीच और अधिक असंतोष बढ़ गया।

लिखित शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

सोसायटी के कुछ रूम मालिकों का कहना है कि उन्होंने बी.एस. कटरे को लिखित रूप में कई शिकायतें दीं।
लेकिन आरोप है कि बाद में कहा गया कि ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। इस स्थिति को लेकर भी निवासियों के बीच भ्रम और असंतोष है।

अवैध पार्किंग और आपातकालीन रास्ते का मुद्दा

स्थानीय निवासियों के अनुसार, सोसायटी से जुड़े एक फेडरेशन के माध्यम से कथित रूप से म्हाडा के आपातकालीन रास्ते के आसपास 3 और 4 व्हीलर वाहनों की पार्किंग शुरू कर दी गई थी
निवासियों का कहना है कि इससे हजारों परिवारों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता था, क्योंकि आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस के लिए रास्ता प्रभावित हो सकता है।

पार्किंग शुल्क वसूली के आरोप

कुछ वाहन मालिकों का आरोप है कि उनसे वर्षों तक पार्किंग शुल्क लिया गया।
जब निवासियों ने सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए कि यदि किसी दुर्घटना की स्थिति में फायर ब्रिगेड वाहन अंदर कैसे पहुंचेगा, तो कथित तौर पर मजाकिया अंदाज में “हेलिकॉप्टर मंगवाने” जैसी बात कही गई।
बताया जाता है कि ऐसी बातें स्थानीय पुलिस अधिकारियों के सामने भी कही गई थीं।

अवैध निर्माण और प्रशासनिक कार्रवाई

निवासियों के अनुसार बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए म्हाडा क्षेत्र निर्माण विभाग, गोरेगांव के अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की।

  • अवैध पार्किंग को बंद करने के लिए नोटिस जारी किया गया
  • अवैध निर्माण को हटाने के लिए बुलडोजर भी मौके पर लाया गया
  • फेडरेशन पर लगभग 1 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया

यह कार्रवाई क्षेत्र निर्माण विभाग की ओर से की गई थी।

फिर भी मुख्य विवाद पर कार्रवाई क्यों नहीं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र निर्माण विभाग द्वारा कार्रवाई के बावजूद सोसायटी प्रबंधन से जुड़े मुख्य विवादों पर अब तक कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया है।
इस कारण निवासियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या है और कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।

निष्पक्ष जांच की मांग

सामना नगर और स्वप्नपूर्ति सोसायटी के कई निवासियों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

लोगों का कहना है कि यदि शिकायतें, जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक नोटिस मौजूद हैं, तो संबंधित मामलों में पारदर्शी निर्णय होना चाहिए ताकि सोसायटी के निवासियों का भरोसा प्रशासन पर बना रहे।

अब देखना यह होगा कि म्हाडा और राज्य प्रशासन इन आरोपों और सवालों पर आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या पूरे मामले की व्यापक जांच होती है या नहीं।

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