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भ्रष्ट तंत्र के आगे नतमस्तक मालाड प्रशासन! नोटिस के 1 साल बाद भी कार्रवाई गायब, क्या भू-माफिया के ‘पार्टनर’ बन चुके हैं कुंदन वळवी?

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): अगर आप सोचते हैं कि देश के प्रधानमंत्री या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पास ही सबसे ज्यादा पावर है, तो आप बिल्कुल गलत हैं। मालाड वेस्ट (P/North) वार्ड के सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner) कुंदन वळवी साहब से मिलिए! इनका रूतबा और स्वैग किसी पीएम या सीएम से कम नहीं है। आप अखबारों में इनके खिलाफ चाहे जितने पन्ने काले कर लीजिए, खोजी खबरें छाप-छाप कर थक जाइए, साहब की सेहत पर रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता। साहब का सीधा फंडा है—“दुनिया हिल जाए, पर अपनी कुर्सी और अपनी नींद नहीं हिलनी चाहिए!”

आइए, आज ‘वशिष्ठ वाणी’ के इस विशेष बुलेटिन में कुंदन वळवी और मालाड के ‘गुमशुदा’ नेताओं के इस अद्भुत कारनामे का सरेआम पर्दाफाश करते हैं।


कुंदन वळवी की ‘जादुई’ कला: एक तीर से दो निशाने!

मामला मालाड वेस्ट के भद्रन नगर (रोड नंबर 1) स्थित प्रसिद्ध ‘कोयला वाला गली’ का है। यहाँ नियमों, कानूनों और जनसुरक्षा की अर्थी निकालते हुए सरेआम एक अवैध निर्माण खड़ा कर दिया गया। जब जागरूक नागरिकों ने इसकी शिकायत (P/North) वार्ड के मुखिया कुंदन वळवी से की, तो साहब ने एक ऐसी प्रशासनिक कला का प्रदर्शन किया जिसे ‘मैनेजमेंट गुरुओं’ को सीखना चाहिए।

कुंदन ने तुरंत अवैध निर्माण करने वाले ‘करसन’ नामक व्यक्ति को एक कड़क नोटिस थमा दिया। अब आप सोच रहे होंगे कि वाह! कुंदन वळवी तो बड़े ईमानदार निकले! लेकिन रुकिए, असली क्रोनोलॉजी अब समझिए:

  • निशाना नंबर 1 (शिकायतकर्ता खुश): शिकायत करने वाले को नोटिस की कॉपी दिखाकर खुश कर दिया कि देखो—“हमने तो कार्रवाई शुरू कर दी है!”
  • निशाना नंबर 2 (भू-माफिया अलर्ट): नोटिस के बहाने अवैध निर्माण करने वाले भू-माफिया को चुपके से इशारा कर दिया कि—“भाई, तुम्हारे खिलाफ किसी ने शिकायत कर दी है, अब तुम समझदार हो कि आगे क्या करना है!”

हैप्पी बर्थडे ‘नोटिस साहब’! पूरा एक साल बीता, पर हथौड़ा गायब

हैरानी की बात तो यह है कि इस अवैध निर्माण के खिलाफ बीएमसी द्वारा आधिकारिक तौर पर तोड़ू कार्रवाई (हथौड़ा चलाने) का नोटिस 21 मई 2025 को ही जारी किया गया था। आज साल 2026 का जून महीना चल रहा है। यानी नोटिस महाशय का पहला जन्मदिन भी बीत चुका है, लेकिन बीएमसी का हथौड़ा आज तक भद्रन नगर का रास्ता नहीं ढूंढ पाया है।


कुंदन वळवी को मालाड की सुरक्षा और सुव्यवस्था के लिए नियुक्त किया गया था, लेकिन साहब ‘वर्क फ्रॉम होम’ के अंदाज में भू-माफियाओं के हितों की सुरक्षा करने में व्यस्त हैं। शायद कुंदन वळवी का मानना है कि नोटिस वाइन (शराब) की तरह होते हैं—जितने पुराने होंगे, उतने ही ‘असरदार’ (या मालदार) होंगे!


सांसद पीयूष गोयल और नगरसेवक योगेश वर्मा ‘लापता’!

इस पूरे तमाशे में हमारे माननीय सांसद पीयूष गोयल साहब और स्थानीय नगरसेवक योगेश वर्मा जी का किरदार तो और भी मजेदार है। भद्रन नगर की जनता अपनी समस्याओं को लेकर चीख रही है, अवैध निर्माण से सुरक्षा दांव पर लगी है, लेकिन दोनों ‘माननीय’ इस विषय पर पूरी तरह मौन व्रत धारण कर चुके हैं। मानो दोनों ने मिलकर ‘लापता लेडीज’ फिल्म का पार्ट-2 मालाड में ही शूट कर दिया हो!

नेताओं को अच्छी तरह पता है कि ‘वशिष्ठ वाणी’ चाहे जितनी भी सच्चाई जनता के सामने रख दे, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। उनका आत्मविश्वास तो देखिए—उन्हें पक्का भरोसा है कि जनता की याददाश्त बहुत कमजोर होती है, आज रोएगी पर 5 साल बाद चुनाव आते ही फिर से उन्हीं की झोली में वोट डाल आएगी।


‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा अल्टीमेटम

कुंदन वळवी, अपनी ‘पीएम-सीएम’ वाली इस काल्पनिक दुनिया से बाहर निकलिए! और माननीय नेताओं जी, जनता सब देख रही है। अगर २१ मई २०२५ के नोटिस पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ इशारा करता है कि ‘दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी की पूरी कोयला वाली गली ही काली हो चुकी है।’

‘वशिष्ठ वाणी’ इस प्रशासनिक और राजनीतिक सुस्ती के खिलाफ लगातार हथौड़ा चलाती रहेगी। चाहे कुंदन वळवी कितनी भी गहरी नींद सो लें या नेताजी कितना भी गायब हो जाएं, जनता की अदालत में इनका हिसाब होकर रहेगा!

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