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Lucknow Hrithik Murder Case:  यूपी की राजधानी लखनऊ में ऋतिक मर्डर केस तूल पकड़ता जा रहा है. पीड़ित परिवार के आक्रोश और आरोपों के बीच अखिलेश यादव भी इस मामले में उतर आए हैं. उन्होंने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है. सपा मुखिया का कहना है कि सरकार में बैठे लोग ही आरोपियों को बचा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रापर्टी डीलर ऋतिक पांडेय की हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. ब्राह्मण समाज के संगठनों के प्रदर्शन के बाद अब राजनीतिक दल भी इस हत्याकांड के जरिए योगी सरकार को घेरने में जुट गए हैं. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि सरकार में बैठे लोग ही हत्याकांड के आरोपियों को बचा रहे हैं. उन्होंने सरोजनीनगर कनेक्शन का भी जिक्र किया. हालांकि उन्होंने खुलकर कुछ नहीं बोला.

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21 जुलाई की रात को लखनऊ के बंथरा के कुछ घरों में बिजली नहीं आ रही थी. बिजली ठीक करवाने के लिए कुछ लोग ट्रांसफॉर्मर के पास पहुंचे. इसमें 22 साल का ऋतिक पांडेय भी था. इस दौरान उन लोगों ने विरोध शुरू कर दिया, जिनके घर पर लाइट आ रही थी. विरोध कर रहे लोगों और ऋतिक पांडेय के बीच मामूली बहस हो गई. मौके पर मौजूद लोगों ने मामला शांत करा दिया, लेकिन रात करीब 10:30 बजे फिर बवाल शुरू हो गया.

लाठी-डंडे से पीटकर ऋतिक की हत्या

ऋतिक के पिता की तहरीर के मुताबिक, अवनीश सिंह, हिमांशु सिंह, प्रियांशू सिंह, प्रत्यूष सिंह, शनि सिंह अपने कई साथियों को लेकर लाठी-डंडों और असलहों के साथ घर में घुस आए. उन्होंने घर में मौजूद लोगों की पिटाई शुरू कर दी. ऋतिक को इतनी बेरहमी से पिटा कि उसकी हालत बिगड़ गई. आनन-फानन में उसे अस्पताल में एडमिट कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई. परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया था.

पुलिस देखती रही रील, परिजनों को थाने से भगाया

ऋतिक के परिजनों का कहना था कि जब आरोपी घर में घुसे थे, तब हमने बंथरा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिसकर्मी हंसी-मजाक करते हुए मोबाइल पर रील देखने में लगे रहे और सुबह आने की बात कहकर हमें भगा दिया. ऋतिक की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू किया था, जिसके बाद मामला बढ़ा और पुलिस भी हरकत में आई. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.

अबतक इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मी सस्पेंड

जब स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच की गई तो कई खुलासे हुए. जांच रिपोर्ट से पता चला कि बंथरा थाने का सिपाही यतेंद्र सिंह आरोपियों के संपर्क में था. इसकी जानकारी इंस्पेक्टर हेमंत राघव को भी थी. इंस्पेक्टर ने मामले को दबाए रखा. इस मामले में इंस्पेक्टर हेमंत राघव, दो दरोगा सुभाष यादव व सुशील यादव और सिपाही यतेंद्र सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है. साथ ही पूरे मामले की जांच सीनियर अधिकारी को सौंप दी गई है.

किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं

इस मामले में अभी तक किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है. नामजद आरोपियों की तलाश में कानपुर, उन्नाव समेत 15 जगहों पर दबिश दी जा चुकी है. आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से ब्राह्मण समाज से जुड़े कई संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) का डेलिगेशन भी मृतक के परिजनों से मिलने गया था.

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