मुंबई: क्या मुंबई की सड़कों का मालिक प्रशासन है या रसूखदार व्यावसायिक प्रतिष्ठान? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि लिंक रोड पर अवैध पार्किंग के खिलाफ महीनों से जारी मुहिम एक अंतहीन चक्र बन गई है। वशिष्ठ वाणी की ग्राउंड रिपोर्टिंग में बार-बार यह सामने आया है कि प्रशासनिक कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद अवैध पार्किंग का खेल फिर से शुरू हो जाता है।
दिखावे की कार्रवाई, अंदरखाने का ‘सेटिंग’ का खेल
स्थानीय नागरिकों और जागरूक पत्रकारों के लगातार दबाव के बाद प्रशासन मौके पर आता है, खानापूर्ति के लिए कुछ गाड़ियाँ हटाई जाती हैं या मामूली जुर्माना लगाया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि यह ‘मौसमी कार्रवाई’ आखिर कब तक चलेगी?
विश्वसनीय सूत्रों और रेस्टोरेंट व सैलून के कर्मचारियों के चौंकाने वाले खुलासे के अनुसार, यहाँ का अवैध पार्किंग धंधा केवल मनमर्जी नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित ‘सिस्टम’ का हिस्सा है। कई कर्मचारियों ने दबी जुबान में स्वीकार किया है कि आरटीओ के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के साथ उनकी गहरी ‘सांठगांठ’ है। जब भी आरटीओ की टीम आती है, तो बस एक ‘कोड’ या इशारा काफी होता है—अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बन जाते हैं और कार्रवाई के नाम पर केवल रस्म अदायगी होती है।
क्या जनता का सड़क पर चलने का अधिकार गिरवी रख दिया गया है?
एक तरफ मुंबई पुलिस और बीएमसी (BMC) सुरक्षा और सुगम यातायात का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ लिंक रोड पर फुटपाथ और मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा निजी फायदे के लिए कब्ज़ा लिया गया है। आम नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर बीच सड़क चलने को मजबूर हैं, जबकि आरटीओ अधिकारी अपनी आँखों पर पट्टी बाँधे बैठे हैं।
प्रशासन से तीखा सवाल: शर्मिंदगी या ईमानदारी?
आज मुंबई का आम नागरिक यह पूछने पर मजबूर है:
- क्या आरटीओ के अधिकारी अपनी वर्दी का मान रखेंगे या ‘सेटिंग’ के आगे नतमस्तक रहेंगे?
- कब तक लिंक रोड पर निजी व्यवसायियों की ‘पार्किंग लॉबी’ का कब्जा बना रहेगा?
- क्या यह साठगांठ विभागीय भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा नहीं है?
वशिष्ठ वाणी की यह मुहिम केवल पार्किंग हटाने तक सीमित नहीं है। हमारा अगला कदम इस सिस्टम में बैठे उन ‘चेहरों’ को बेनकाब करना है जो कानून को अपनी जेब में रखकर बैठे हैं। यदि अधिकारियों में रत्ती भर भी कार्यक्षमता और नैतिकता बची है, तो वे इस संगठित भ्रष्टाचार का संज्ञान लें। अन्यथा, जनता का यह आक्रोश जल्द ही एक बड़े आंदोलन का रूप लेगा।
मुंबई की जनता देख रही है, और अब ‘सेटिंग’ का यह खेल और नहीं चलने दिया जाएगा।











