मुंबई/वशिष्ठ वाणी: कांदिवली वेस्ट स्थित भूमि पार्क रोड (छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर) का यह नजारा भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत की सभी हदें पार कर चुका है। यहाँ भारत गैस एजेंसी (Bharat Gas Agency) की 10 से 15 गाड़ियाँ और सिलेंडर से भरे वाहन 24 घंटे लगातार खुलेआम सड़क पर खड़े रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह अवैध सिलसिला पिछले 20 वर्षों से बदस्तूर जारी है!
ट्रांसफर का खेल और अधिकारियों की ‘मलाई’ की नीति
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा कड़वा सच यह है कि जब भी कांदिवली ट्रैफिक विभाग में किसी वरिष्ठ अधिकारी का ट्रांसफर होता है, तो वह जाने से पहले अपने नए अधिकारी को यह ‘गुप्त जानकारी’ देकर जाता है— “यहाँ यह अवैध कारोबार चलता है, यह तेरी कमाई का जरिया है, तू इसे छेड़ना मत और वशिष्ठ वाणी की खबरों से बिल्कुल परेशान मत होना, चाहे वे कितनी भी शिकायतें क्यों न करें!”
यहाँ तक कि यदि कोई मीडिया टीम या नागरिक एसीपी (ACP) स्तर के अधिकारी के पास भी शिकायत लेकर पहुँच जाए, तो उनकी भी कोई सुनवाई नहीं होती। कमाल की बात है ना? यह बात आज बच्चा-बच्चा जानता है कि बिना ऊपर से लेकर नीचे तक की मिलीभगत और ‘हिस्सेदारी’ के कोई भी अवैध पार्किंग या गोदाम इस तरह मुख्य सड़क पर नहीं चल सकता। इन भ्रष्ट अधिकारियों को जनता की जान की कोई परवाह नहीं है, इन्हें सिर्फ अपनी ‘मलाई’ और अवैध वसूली से मतलब है! चाहे खुलेआम सड़क पर रखे गैस सिलेंडरों से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो जाए और वहाँ रहने वाले सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ जाए, इन लापरवाहों को उससे क्या लेना-देना?
सतीश राउत का झूठा बहाना और इतिहास का सच
आपको याद होगा कि इससे पहले शातिर अधिकारी सतीश राउत (Satish Raut) ने बेशर्मी की हद पार करते हुए यहाँ तक कह दिया था कि “भूमि पार्क रोड पर भारत गैस एजेंसी को गोदाम बनाने की अनुमति महाराष्ट्र सरकार ने दी है!”
लेकिन जब पोल खुली तो वह सफेद झूठ साबित हुआ। हालांकि, जब उनका कार्यकाल पूरा हुआ, तो उन्हें उनकी इस ‘सेवा’ का फल मिला और उनका तबादला हो गया। अब कांदिवली ट्रैफिक विभाग में जो नए अधिकारी आए हैं, उन्हें भी अपनी मलाई और एसीपी साहब की ‘कृपा’ का पूरा अनुमान होगा ही, इसीलिए आज तक भूमि पार्क रोड को खाली नहीं करवाया गया है!
‘वशिष्ठ वाणी’ की कलम से: शर्म करो!
जनता की सुरक्षा को ताक पर रखकर दलालों की मलाई खाने वाले इन अधिकारियों के जमीर पर अब कोई असर नहीं पड़ने वाला। हमारी मीडिया सिर्फ अपनी कलम चलाकर इन बेगैरत और लापरवाह अधिकारियों के मुँह पर सिर्फ एक ही बात कह सकती है— शर्म करो!
जब तक ऐसे भ्रष्ट तंत्र और एसीपी से लेकर नीचे तक के अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक गाज नहीं गिरेगी, तब तक यह खुला खेल यूं ही जारी रहेगा। ‘वशिष्ठ वाणी’ इन चेहरों को बेनकाब करता रहेगा!













