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क्या बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े भी सो रही हैं कुंभकर्णी नींद? सालभर पुराना नोटिस बना रद्दी, मालाड में खड़ा हुआ ‘अवैध किला’!

मुंबई / मालाड वेस्ट: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका (BMC) के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां कहीं और नहीं, बल्कि मालाड वेस्ट के भद्रन नगर (रोड नंबर 1) स्थित ‘कोयला वाला गली’ में सरेआम उड़ाई जा रही हैं। यहाँ नियमों और जनसुरक्षा को ताक पर रखकर एक विशाल और जानलेवा अवैध निर्माण खड़ा कर दिया गया है।


इस पूरे मामले का सबसे हास्यास्पद और शर्मनाक पहलू बीएमसी की प्रशासनिक लाचारी या कहें तो सोची-समझी खामोशी है। स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत का आलम यह है कि पी/उत्तर (P/North) वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के कार्यालय से 21 मई 2025 को ही इस अवैध निर्माण के खिलाफ आधिकारिक तौर पर तोड़ू कार्रवाई (हथौड़ा चलाने) का नोटिस जारी किया गया था। लेकिन आज पूरा एक साल बीत जाने के बाद भी अधिकारी गहरी नींद से जागने को तैयार नहीं हैं।


कुंदन वळवी की खामोशी पर उठे सवाल: क्या नोटिस सिर्फ ‘सेटिंग’ का जरिया था?

सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के नाक के नीचे चल रहे इस खेल ने बीएमसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब खुद विभाग ने इस ढांचे को अवैध मानकर सालभर पहले नोटिस थमाया था, तो आज तक उस अवैध ढांचे की एक ईंट भी क्यों नहीं हिली? 57 दिनों से लगातार मीडिया में सबूतों के साथ इस भ्रष्टाचार को उजागर किया जा रहा है, लेकिन अधिकारी टस से मस नहीं हो रहे। जनता अब यह पूछने पर मजबूर है कि क्या यह नोटिस सिर्फ कागजी खानापूर्ति और भू-माफियाओं से ‘सेटिंग का खेल’ शुरू करने का एक जरिया मात्र था?

मैडम कमिश्नर, कब चलेगा आपका हंटर?

जब स्थानीय स्तर पर पी/उत्तर वार्ड का सहायक आयुक्त कार्यालय पूरी तरह नतमस्तक हो चुका हो, तब अंतिम उम्मीद सिर्फ शीर्ष नेतृत्व यानी बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े से बचती है। मुंबई की कमान संभाल रहीं अश्विनी भिड़े के प्रशासनिक अनुशासन और कड़क मिजाज के चर्चे तो बहुत सुने जाते हैं, लेकिन मालाड का यह मामला उनके दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

जनता अब सीधे मैडम कमिश्नर से पूछ रही है— “आखिर बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े अपनी कुंभकर्णी नींद से कब उठेंगी?” क्या पी/उत्तर वार्ड के भ्रष्ट अधिकारियों की फाइलों का ‘वजन’ कमिश्नर कार्यालय के हंटर से ज्यादा भारी हो चुका है, या फिर कमिश्नर मैडम ने भी मालाड की जनता को इन भू-माफियाओं के रहमों-करम पर छोड़ दिया है?

अब देखना यह है कि क्या कमिश्नर अश्विनी भिड़े इस मामले में सीधे दखल देकर इस भ्रष्ट तंत्र और अवैध निर्माण पर गाज गिराती हैं, या फिर भू-माफियाओं का यह राज इसी तरह बीएमसी की नाक के नीचे फलता-फूलता रहेगा।

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