बीकानेर। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में प्रशासन ने अब ‘सख्ती की डोज’ देनी शुरू कर दी है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीसी घीया ने हाल ही में आपातकालीन इकाई और ट्रॉमा सेंटर का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखी। इस दौरान कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें नोटिस थमाए गए। निरीक्षण के समय आपातकालीन कक्ष में अनुपस्थित पाए गए सीएमओ और ट्रॉमा सेंटर के दवा वितरण केंद्र से नदारद फार्मासिस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
निरीक्षण के दौरान डॉ. घीया ने न केवल व्यवस्थाओं का अवलोकन किया, बल्कि वहां उपचाराधीन मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद भी किया। उन्होंने उपचार की गुणवत्ता, दवा वितरण, जांच मशीनों की कार्यक्षमता और अन्य मूलभूत सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मरीजों द्वारा बताई गई समस्याओं को मौके पर ही नोट कर सुधार के सख्त निर्देश दिए गए।
अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि अब मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में रेफर करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। अब रेजिडेंट स्तर पर मरीजों को रेफर करने पर रोक लगा दी गई है; किसी भी रेफरल के लिए संबंधित सीएमओ की मौजूदगी और उनकी अनुमति अनिवार्य होगी। इस निर्णय से मरीजों को होने वाले अनावश्यक भटकाव और असुविधा से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।अस्पताल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कड़ी में डॉ. घीया ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू को आगामी कुछ दिनों में पूरी तरह शुरू कर दिया जाएगा, जिससे गंभीर मरीजों को तत्काल और उच्च स्तरीय जीवन रक्षक उपचार मिल सकेगा। इसके अलावा, अस्पताल में अनुशासन बनाए रखने के लिए ड्रेस कोड का पालन नहीं करने वाले डॉक्टरों के विरुद्ध भी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। सुरक्षा तंत्र को और अधिक पुख्ता करने के लिए जल्द ही नए सुरक्षा मानक और बदलाव लागू किए जाएंगे। अधीक्षक ने दोहराया कि राज्य सरकार आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
व्यवस्थाओं में बदलाव या सख्ती का असर? पीबीएम अस्पताल में हालिया निरीक्षण और सख्त फैसले यह संकेत दे रहे हैं कि अब स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही तय की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब जिम्मेदारी स्पष्ट होती है और निगरानी मजबूत होती है, तो सेवाओं की गुणवत्ता स्वतः बेहतर होती है। सीएमओ की अनिवार्य मौजूदगी और रेफरल प्रक्रिया में बदलाव जैसे कदम मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। आने वाले समय में इन सुधारों का सीधा लाभ आम मरीजों को मिलने की उम्मीद है।













