मुंबई (मालाड): मालाड (पश्चिम) के प्रभाग क्रमांक 35, गौतम बुद्ध मार्ग स्थित सेंट टेरेसा स्कूल के टेरेस पर किए गए कथित अवैध निर्माण ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। स्कूल की छत पर लोहे के चैनल, कमजोर एंगल और सीमेंट की चादरों (AC Sheets) का उपयोग कर खड़ा किया गया यह ढांचा किसी भी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहा है।
क्या है पूरा मामला?
सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिव सम्राट फाउंडेशन के अध्यक्ष सम्राट अभिमान बागुल ने इस संबंध में 19 जून 2026 को मुंबई महानगरपालिका (BMC) के पी/उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन वलवी और इमारत व कारखाना विभाग के सहायक अभियंताओं को एक गंभीर लिखित शिकायत सौंपी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि:
इससे स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे सैकड़ों विद्यार्थियों के जीवन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
स्कूल प्रशासन द्वारा टेरेस पर बिना किसी वैध अनुमति के लोहे की संरचना खड़ी की गई है।
यह निर्माण अत्यंत कमजोर और खतरनाक है, जो तेज हवाओं या बारिश के दौरान गिर सकता है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
अत्यंत संवेदनशील मामला होने के बावजूद अब तक मनपा द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि यह ढांचा गिरने से कोई अनहोनी होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
कानूनी कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता सम्राट बागुल ने मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 की धारा 351 के तहत तत्काल प्रभाव से नोटिस जारी करने और अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
पारदर्शिता: की गई कार्रवाई की लिखित रिपोर्ट शिकायतकर्ता को सौंपी जाए।
स्थल निरीक्षण: प्रशासन तत्काल मौके पर जाकर अवैध निर्माण की जांच करे।
दोषियों पर कार्रवाई: नियमों को ताक पर रखने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों पर कानूनी कार्यवाही की जाए।
अधिकारी कब जागेंगे?
अब सभी की निगाहें सहायक आयुक्त कुंदन वलवी और उनके विभाग पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों का प्रश्न है कि क्या प्रशासन विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा या यह शिकायत भी पुरानी फाइलों में दबी रह जाएगी?
वशिष्ठ वाणी की अपील: छात्रों की सुरक्षा किसी भी व्यावसायिक लाभ या लापरवाही से बढ़कर है। प्रशासन को समय रहते इस खतरनाक निर्माण को हटाकर एक उदाहरण पेश करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी स्कूल परिसर में ऐसे अवैध निर्माण की हिम्मत न हो।













