Monday, January 19, 2026
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ढाबे पर की पार्टी आरोपियों के लिए नासूर, कर दिया हत्याकांड का खुलासा, हैरान कर देगी हत्या की कहानी

32 साल की तेजस्विनी रंगा अपने पति रंगा एआर और दो बच्चों धरणीश और मनोज के साथ हसन शहर में रहती थीं. जब उनके पति और बच्चे घर से बाहर गए तो उनकी हत्या कर दी जाती है. इसके बाद मीडिया इस मामले को सुलझाने के लिए पुलिस पर भारी दबाव बनाती है लेकिन पुलिस 15 दिन तक आरोपियों तक पहुंचने में असफल रहती है. अगर आरोपियों ने ढाबे पर पार्टी न की होती तो पुलिस उन तक कभी नहीं पहुंच पाती.

Crime News: सितंबर 2013 की बात है, कर्नाटक के बेंगलुरु से 183 किमी दूर हसन शहर में एक 32 वर्षीय महिला की बेरहमी से गला काटकर हत्या कर दी गई थी. घर में घुसकर महिला की बेरहमी से की गई हत्या को स्थानीय मीडिया ने इस कदर उठाया कि पुलिस पर इस केस को सुलझाने का भारी दबाव बन गया. शायद पुलिस इस केस को कभी न सुलझा पाती लेकिन आरोपियों द्वारा कत्ल करने के बाद ढाबे पर की गई पार्टी उन लोगों के लिए नासूर बन गई.

2013 का है मामला

32 साल की तेजस्विनी रंगा अपने पति रंगा एआर और दो बच्चों धरणीश और मनोज के साथ हसन शहर में रहती थीं. रंगा कर्नाटक राज्य वित्तीय निगम में क्लर्क थे. 30 सितंबर 2013 को रंगा हमेशा की तरह सुबह 9.30 बजे दफ्तर के लिए निकल गए और बच्चों को स्कूल छोड़ दिया. इसके बाद वे किसी निजी काम से हसन से 24 किलोमीटर दूर गोरूर चले गए. दोपहर करीब 1 बजे रंगा को उनके एक सहकर्मी गणेश का फोन आया और उसने रंगा को तुरंत घर वापस लौटने को कहा. वहीं जब मनोज स्कूल से घर लौटा तो उसने देखा कि उसकी मां मृत पड़ी है.

यह समय के खिलाफ दौड़ थी

रंगा जब घर लौटे तो उन्होंने देखा कि घर की अलमारियों का सारा सामान बिखरा पड़ा था. इसके बाद हसन एक्सटेंशन पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज किया गया. उस दौरान संजीव गौड़ा एचबी हसन टाउन पुलिस स्टेशन में पुलिस इंस्पेक्टर थे. गौड़ा बताते हैं कि यह केस ‘समय के खिलाफ दौड़’ थी.

इस हत्या की जांच के लिए स्थानीय पुलिस ने जिले के अन्य पुलिस स्टेशनों के पुलिसकर्मियों को भी इसमें शामिल किया. चत्ररायपटना ग्रामीण पुलिस स्टेशन के पुलिस उपनिरीक्षक सुरेश पी को टेक्निकल डिटेल्स इकट्ठा करने और तेजस्विनी और संदिग्धों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)  खंगालने में लगाया गया.

खाली कप से आसान हुई जांच

गौड़ा ने बताया, ‘जैसे ही हम घर में दाखिल हुए हमें वहां काफी के कुछ खाली कप मिले. इससे हमें अंदाजा हो गया कि हत्यारे जो भी थे वे तेजस्विनी को जानने वाले थे. हमने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की कोशिश की. हमने हत्या के 30 मिनट पहले और 30 मिनट बात का फुटेज चेक किया. हमने पाया कि एक टाटा इंडिका कार हत्या से पहले और बाद में दो बार इस सड़क से गुजरी थी. कैमरे में कम रिजॉल्यूशन के कारण कार का नंबर ठीक से पता नहीं चल सका लेकिन कार पर KA-02 नंबर दिख रहा था जिसका मतलब था कि कार बेंगलुरु में ही रजिस्टर हुई थी. KA-02 के दम पर हमने मामले को सुलझाने की कोशिश की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

पुलिस के छूटे पसीने

पुलिस ने इस गाड़ी की तलाश में तमाम हाईवे, टोल खंगाले लेकिन ऐसी कोई गाड़ी उस समय टोल से नहीं गुजरी. इसके बाद पुलिस ने इस एंगल से जांच लगभग बंद कर दी. पुलिस को पता चला कि घटना स्थल से तेजस्विनी का मोबाइल गायब था. गौड़ा ने कहा कि जब सीडीआर की जांच की गई तो कोई नतीजा नहीं निकला. उन्होंने बताया कि सच कहूं तो तेजस्विनी के पति रांगा हमारे संदिग्धों में से एक थे क्योंकि हत्या के वक्त वे घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे.

लव एंगल भी तलाशा गया

जांच में लव एंगल भी तलाश गया. पुलिस ने कहा कि हमने जांच की कि क्या तेजस्विनी का शादी से पहले कोई प्रेमी था. जांच में पता चला कि तेजस्विनी का एक प्रेमी था लेकिन वह सालों से उसके संपर्क में नहीं था. कोई सुराग न मिलने पर पुलिस परेशान हो चुकी थी. हत्या के दिन बीतते जा रहे थे और पुलिस पर हत्यारों को पकड़ने का दबाव बढ़ता ही जा रहा था. हालांकि पुलिस ने हत्या के समय इलाके में सक्रिय मोबाइल फोन को ट्रैक करना जारी रखा लेकिन उसे कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला. इसके बाद हसन के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रवि डी चन्नानवर ने मामले की जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया.

10वें दिन हाथ लगा अहम सुराग

तेजस्विनी की हत्या के 10 दिन बाद टेक्निकल सबूत तलाश रहे सुरेश पी को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला. सुरेश तजस्विनी के मोबाइल के IMEI नंबर पर नजर रखे हुए थे. उन्होंने बताया कि हमने पाया कि मोबाइल फोन चालू था लेकिन इसमें कोई दूसरा नंबर डला हुआ था और यह हाईवे पर एक ढावे पर ऑपरेट हो रहा था.

ढाबे पर पार्टी न की होती तो बच जाते आरोपी

इसके बाद पुलिस की टीम ट्रैक कर तुरंत उस ढाबे पर पहुंची और मोबाइल चला रहे व्यक्ति को पकड़ लिया. शख्स ने पुलिस को बताया कि ढाबे पर कुछ लोगों ने खाना खाया था बाद में उन्होंने बिल के पैसे नहीं चुकाए और उसके बदले उसे ये फोन थमा दिया. वहीं ढाबे के मालिक ने कहा कि उसे उन लोगों के नाम पता नहीं हैं जो उस वक्त यहां खाना खाने आए थे. हालांकि पुलिस कुछ स्थानीय लोगों तक पहुंचने में कामयाब रही जो उस समय ढाबे पर खाना खाने वाले उन हत्यारों के साथ थे.

संदिग्धों तक पहुंची पुलिस

पुलिस को पता चला कि हत्या के दिन आरोपी ढाबे पर आए थे. इसके बाद पुलिस ने एक स्थानीय की मदद से ढावा मालिक से बात की. ढाबा मालिक से साक्ष्य मिलने के आधार पर पुलिस हत्यारों के स्थानीय दोस्तों के पास पहुंची. पुलिस को पता चला कि संदिग्धों में से एक मंजेगौड़ा था. मंजेगौड़ा चन्नारायपटना में एक हत्या के मामले में पहले भी गिरफ्तार हुआ था.

मंजेगौड़ा ने उगल दिए आरोपियों के नाम

गौड़ा ने बताया कि उसके घर की तलाशी लेने पर हमें उसके घर से एक चांदी का सिक्का मिला जो तेजस्विनी के घर से चुराया गया था. उसकी भूमिका स्पष्ट हो गई थी, अब पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में थी.  मंजेगौड़ा ने पुलिस पूछताछ में अन्य आरोपियों के नाम भी उगल दिए. आरोपियों में कुछ लोग चन्नारायपटना और कुछ बेंगलुरु के थे.

कुछ बड़ा करना चाहते थे आरोपी

जांच में पुलिस को पता चला कि एक आरोपी सुनील कार ड्राइवर था और बेंगलुरु में कार चुराने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था, जहां उसकी मुलाकात मनु नाम के एक अन्य आरोपी से हुई थी जो इसी तरह के मामले में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने बताया कि दोनों कुछ बड़ा करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपनी टीम में कुछ अन्य लोगों को शामिल करने का फैसला किया.

फिर ऐसे दिया हत्या को अंजाम

मनु जेल से बाहर आया और बाहर आकर बेंगलुरु के रहने वाले अपने दोस्त कुमार से मिला. कुमार की फैमिली ने धर्मस्थल जाने की योजना बनाई. अपनी यात्रा में उन्होंने मनु को अपना कार ड्राइवर रख लिया. बेंगलुरु लौटते समय कुमार का परिवार तेजस्विनी के घर पर रुकता है. उस दिन मनु तेजस्विनी को सोने के गहने पहने हुए देखता है जिसके बाद वह तेजस्विनी को लूटने का मन बना लेता है.

तेजस्विनी मनु को जानती थी इसलिए मनु और कुमार की फैमिली आसानी से तेजस्विनी के घर ठहर जाती है. वही सुनील घर के बाहर पुलिस पर नजर रखे होता है. जैसे ही तेजस्विनी सभी लोगों को कॉफी परोसती है तीनों आरोपी उसका मुंह दबा देते हैं और फिर उसका गला काट देते हैं.

इसके बाद वे तेजस्विनी का का 40 ग्राम का मंगलसूत्र, एक सोने का हार और 10 लाख रुपए का अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो जाते हैं. पुलिस की नजरों से बचने के लिए वह अपनी यात्रा में हाइवे का इस्तेमाल नहीं करते. हत्या के 11 साल बाद पुलिस अधिकारी सुरेश इस घटना को लेकर कहते हैं कि यह एक निर्मम हत्या थी. 4 अक्टूबर 2017 को अदालत ने सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

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