मुंबई | वशिष्ठ वाणी | मालवणी से विशेष रिपोर्ट
मालवणी स्थित ओम सिद्धविनायक सोसाइटी एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। सोसाइटी के सचिव फैयाज शेख पर पद के कथित दुरुपयोग, रूम दलाली, प्रबंधन में अनियमितताओं और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन जैसे कई आरोप लगाए जा रहे हैं।
रूम दलाली के आरोप और कानूनी नोटिस
सूत्रों के अनुसार, सचिव पर लंबे समय से रूम दलाली करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस संबंध में सोसाइटी के एक कमेटी सदस्य द्वारा वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भी भेजा गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से इस मुद्दे को उठाया गया। हालांकि, आरोप है कि नोटिस के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ और गतिविधियां जारी रहीं।
कमेटी गठन पर नियम उल्लंघन का दावा
प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार यदि किसी सोसाइटी में 100 से अधिक रूम हैं, तो प्रबंधन समिति में 13 सदस्यों का गठन अनिवार्य बताया जाता है। लेकिन आरोप है कि यहां केवल 10 सदस्यों की कमेटी बनाई गई।
बताया जाता है कि इनमें से अधिकांश सदस्य सचिव के समर्थन में हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं और विरोध की आवाज प्रभावी रूप से सामने नहीं आ पा रही है।
आपातकालीन मार्ग पर दरवाजा लगाने का आरोप
सोसाइटी पर यह भी आरोप है कि आपातकालीन निकास मार्ग (Emergency Exit) पर दरवाजा लगाकर उसे बंद कर दिया गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा मानकों के खिलाफ है और किसी भी आपात स्थिति में बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।

पुराने वाटर टैंक पर कथित अवैध गार्डन
सबसे गंभीर आरोपों में से एक सोसाइटी के करीब 15 वर्ष पुराने जर्जर वाटर टैंक के ऊपर सीमेंट स्लैब डालकर गार्डन निर्माण का मामला है। आरोप है कि कमजोर संरचना के ऊपर इस तरह का निर्माण सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकता है और नियमों का उल्लंघन है।
विधायक फंड के उपयोग पर सवाल
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस गार्डन के निर्माण के लिए विधायक फंड का उपयोग किया गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में स्थान की स्थिति को देखते हुए फंड देने से इनकार किया गया था, लेकिन बाद में फंड स्वीकृत किया गया। अब इस बात की जांच की मांग उठ रही है कि फंड का उपयोग नियमों के तहत हुआ या नहीं।

म्हाडा में शिकायत दर्ज
इन सभी मामलों को लेकर एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा द्वारा दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ म्हाडा के उपनिबंधक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत के बाद सोसाइटी को नोटिस भी भेजा गया था।
आरोप है कि नोटिस के बावजूद सचिव कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए और मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
निर्माण विभाग पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुंबई क्षेत्र निर्माण विभाग, गोरेगांव के अधिकारियों को भी मामले की जानकारी है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शिकायतों और नोटिस के बावजूद कार्रवाई क्यों लंबित है।
मीटिंग और कथित विवादित बयान
जानकारी के अनुसार, सचिव द्वारा एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें रूम मालिकों से पूछा गया कि यदि सचिव रूम दलाली करता है तो क्या किसी को आपत्ति है। बताया जाता है कि अधिकांश ने आपत्ति नहीं जताई, हालांकि इस प्रक्रिया का कोई आधिकारिक वीडियो या रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
सचिव और मैनेजर की भूमिका पर सवाल
आरोप यह भी है कि सचिव स्वयं प्रबंधन की भूमिका निभा रहे थे और बाद में अपनी पत्नी को मैनेजर नियुक्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक कार्यों को लेकर पारदर्शिता की कमी है और वास्तविक संचालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब आगे क्या?
इन सभी आरोपों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि संबंधित विभाग कब तक जांच शुरू करेगा और क्या सोसाइटी प्रबंधन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होगी।
निवासियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए, ताकि सोसाइटी में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।








