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‘वशिष्ठ वाणी’ महा-अभियान: नाम बड़ा और दर्शन छोटे! मालाड में VIBGYOR स्कूल की बसों ने मुख्य सड़क को बनाया ‘निजी पार्किंग’; गोरेगांव ट्रैफिक विभाग और RTO को खुली चुनौती, आखिर किसने दी अनुमति?

ब्यूरो, मुंबई (वशिष्ठ वाणी): सड़कों पर अवैध कब्ज़े और आम जनता को रोज़ाना होने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा चलाई जा रही विशेष मुहिम के तहत आज एक और बहुत बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुंबई के मालाड-गोरेगांव इलाके में वीआईपी और बड़े नामी संस्थानों द्वारा कानून को ठेंगा दिखाने का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। ताज़ा मामला मालाड (पश्चिम) के चिंचोली बंदर रोड, राजन पाड़ा, राम नगर इलाके का है, जहां देश के नामी इंटरनेशनल स्कूलों में शुमार ‘विबग्योर राइज़’ (VIBGYOR Rise) की बड़ी-बड़ी स्कूल बसों ने मुख्य सार्वजनिक सड़क को ही अपनी निजी पार्किंग में तब्दील कर दिया है।

जब स्कूल परिसर में पार्किंग की जगह नहीं, तो सड़कों को बंधक बनाने का अधिकार किसने दिया?

‘वशिष्ठ वाणी’ की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि विबग्योर स्कूल की दर्जनों बसें रोज़ाना नियम से इस मुख्य सड़क पर एक लंबी कतार में खड़ी की जाती हैं। सवाल यह उठता है कि विबग्योर स्कूल प्रबंधन एक बेहद हाई-प्रोफाइल और बड़ा नाम है, जिसने फीस के नाम पर तो बड़े-बड़े ऊंचे मानक तय कर रखे हैं, लेकिन जब अपनी बसों के लिए पार्किंग स्पेस की बात आई, तो नियमों को ताक पर रख दिया।

जनता आज यह तीखा सवाल पूछ रही है कि जब स्कूल के पास अपने वाहनों को खड़ा करने के लिए खुद का परिसर या पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं थी, तो फिर इन भारी बसों को २४ घंटे सार्वजनिक सड़क पर खड़ी करने की अनुमति इन्हें किसने दी? क्या पैसे और बड़े नाम के रसूख के आगे मुंबई की सड़कें निजी संपत्ति बन चुकी हैं?

गोरेगांव ट्रैफिक विभाग और मुंबई RTO को खुली चुनौती! आखिर बड़ी कार्रवाई से क्यों बच रहा है तंत्र?

सड़क के इस हिस्से पर स्कूल बसों के इस अवैध ठहराव के कारण स्थानीय निवासियों, राहगीरों और दफ्तर आने-जाने वाले लोगों को रोज़ाना भारी परेशानी और जाम का सामना करना पड़ता है। विबग्योर स्कूल की बसों का इस तरह बेखौफ सड़क घेरकर खड़े होना साफ तौर पर गोरेगांव ट्रैफिक विभाग और मुंबई आरटीओ (RTO) की कार्यप्रणाली को खुली चुनौती दे रहा है।

आम जनता यह जानना चाहती है कि जो ट्रैफिक पुलिस आम नागरिकों की गाड़ियों को टो करने (उठाने) और भारी-भरकम जुर्माना वसूलने में एक मिनट की भी ढील नहीं देती, वह इस बड़े स्कूल की अवैध रूप से खड़ी बसों के आगे इतनी लाचार और मूकदर्शक क्यों बनी हुई है? आखिर गोरेगांव ट्रैफिक चौकी के अधिकारी इस खुले उल्लंघन पर कोई ठोस और दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या बड़े नामों के खिलाफ कार्रवाई करने में विभाग के हाथ कांपते हैं, या फिर इसके पीछे कोई और मूक सहमति काम कर रही है?

‘वशिष्ठ वाणी’ की मुहिम रुकेगी नहीं, अब आर-पार की होगी लड़ाई

‘वशिष्ठ वाणी’ अपनी इस सड़क सुरक्षा और अवैध पार्किंग के खिलाफ मुहिम को और तेज करने जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा और स्कूल की साख की आड़ में सार्वजनिक रास्तों को इस तरह बंधक बनाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। हमारी टीम ने इस पूरी अवैध बस पार्किंग के पुख्ता वीडियो और जमीनी सुबूतों को रिकॉर्ड कर लिया है।

हम इस गंभीर मुद्दे को लेकर सीधे गोरेगांव ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, आरटीओ और शिक्षा विभाग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराने जा रहे हैं। जनता के अधिकारों को दबाकर सड़कों को निजी गैराज बनाने वाले इस सिंडिकेट के खिलाफ ‘वशिष्ठ वाणी’ तब तक आवाज़ उठाती रहेगी, जब तक कि चिंचोली बंदर रोड की यह मुख्य सड़क आम जनता के लिए पूरी तरह सुचारू और मुक्त नहीं हो जाती।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह रिपोर्ट पूर्णतः सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात सुगमता और प्रशासनिक जवाबदेही को ध्यान में रखकर किया गया एक निष्पक्ष खोजी विश्लेषण है। ‘वशिष्ठ वाणी’ का उद्देश्य किसी शैक्षणिक संस्थान या सरकारी विभाग की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि जनहित में कानून का पालन सुनिश्चित करवाना है।

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