मौत को दावत देता सिस्टम: कांदिवली के एकता नगर में घनी आबादी के बीच २४ घंटे सड़क पर पार्क रहते हैं भारत गैस के वाहन।
ब्यूरो, मुंबई (वशिष्ठ वाणी):
क्या मुंबई में किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासनिक अधिकारियों की नींद खुलती है? क्या देश के सबसे समृद्ध महानगर का तंत्र सिर्फ और सिर्फ लाशें गिनने और जांच कमेटियां बैठाने के लिए आरक्षित हो चुका है? यह झकझोरने वाला सवाल आज कांदिवली (पश्चिम) के छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स, एकता नगर के २५ हजार से अधिक परिवारों के मन में खौफ बनकर तैर रहा है। कारण है—कांदिवली ट्रैफिक विभाग, मुंबई आरटीओ और स्थानीय प्रशासन की वो आपराधिक उदासीनता, जो एक बेहद संवेदनशील और विस्फोटक खतरे को देखने के बाद भी अपनी आँखें मूंद कर बैठी है।
‘टाइम बम’ पर जी रहे हैं २५ हजार परिवार!
जमीनी हकीकत यह है कि एकता नगर स्थित छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के ठीक बाहर मुख्य सड़क पर ‘भारत गैस एजेंसी’ के १० से १४ भारी वाहन २४ घंटे अवैध रूप से पार्क रहते हैं। ये कोई आम गाड़ियां नहीं हैं, बल्कि ये वाहन पूरी तरह से ज्वलनशील एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडरों से भरे होते हैं।
सोचिए, जिस घनी आबादी वाले इलाके में २० से २५ हजार परिवार निवास करते हों, वहां मुख्य सड़क पर सिलेंडरों का इस तरह लावारिस पड़े रहना कितना आत्मघाती है। यदि किसी शरारती तत्व की एक छोटी सी चिंगारी, जलती हुई बीड़ी-सिगरेट या शॉर्ट सर्किट जैसी मामूली लापरवाही भी यहाँ हुई, तो कांदिवली का यह पूरा हिस्सा मलबे और राख के ढेर में तब्दील हो जाएगा। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस भयावह खतरे की पूरी जानकारी होने के बाद भी कांदिवली ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ चैन की नींद सो रहे हैं।
२ महीने से ‘वशिष्ठ वाणी’ की मुहिम, पर अधिकारियों की चमड़ी मोटी!
‘वशिष्ठ वाणी’ पिछले दो महीनों से अधिक समय से इस गंभीर विषय पर लगातार खबरें प्रकाशित कर रहा है, अधिकारियों को साक्ष्य भेज रहा है, और सोशल मीडिया पर लगातार टैग कर रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से लेकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक इस आवाज को पहुँचाया गया। लेकिन अफ़सोस, मुंबई के इस बहरे प्रशासनिक सिस्टम के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।
कभी-कभार अगर कोई कार्रवाई होती भी है, तो वह महज एक ‘कागजी खानापूर्ति’ और फॉर्मेलिटी बनकर रह जाती है। कार्रवाई के नाम पर कुछ मिनटों का नाटक होता है, और अधिकारियों की गाड़ी जाते ही मौत के ये ट्रक फिर से सड़क घेर कर खड़े हो जाते हैं। धरातल पर शून्य कार्रवाई होना सीधे तौर पर यह संदेह पैदा करता है कि क्या इस अवैध और खतरनाक पार्किंग के पीछे कोई गहरा ‘प्रशासनिक घालमेल’ या सांठगांठ काम कर रही है?
‘दुर्घटना’ का इंतजार या कर्तव्य से पूरी तरह से पल्ला झाड़ना?
मुंबई का इतिहास गवाह है कि जब भी कोई घाटकोपर होर्डिंग जैसा बड़ा हादसा होता है, तो मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तुरंत मौके पर पहुँचते हैं, मुआवजे का ऐलान होता है और ‘कमेटी’ बैठा दी जाती है। लेकिन जब ‘वशिष्ठ वाणी’ हादसे से पहले अधिकारियों को जगाने की कोशिश कर रहा है, तो कांदिवली आरटीओ और ट्रैफिक विभाग ने अपनी आंखें पूरी तरह बंद कर रखी हैं।
शिकायतकर्ता आखिर जाए तो कहाँ जाए? जब शिकायत निवारण का पूरा सिस्टम ही पंगु होकर मूकदर्शक बन जाए, तो कानून के शासन का क्या मतलब रह जाता है? पूरे कांदिवली की सड़कें आज अवैध पार्किंग से पटी पड़ी हैं, लेकिन आरटीओ अधिकारियों को आम नागरिकों की जान से खिलवाड़ करने में रत्ती भर भी शर्म महसूस नहीं हो रही है।
यह सीधे आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की विफलता है
यह रिपोर्ट केवल ट्रैफिक जाम की शिकायत नहीं है, बल्कि यह ‘विस्फोटक अधिनियम’ (Explosives Act) और सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों का खुला उल्लंघन है। ‘वशिष्ठ वाणी’ मुंबई आरटीओ और कांदिवली ट्रैफिक विभाग से यह सीधा और अंतिम सवाल पूछता है: क्या आप किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहे हैं?
एकता नगर की जनता को अब खोखले आश्वासनों या अस्थाई खानापूर्ति की नहीं, बल्कि इन गैस सिलेंडरों से भरे वाहनों को तत्काल वहां से हटाने और रिहायशी इलाकों को सुरक्षित करने के लिए ठोस और स्थाई दंडात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।












