मुंबई: यह सवाल आज हर उस आम मुंबईकर का है जो अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर चलने को मजबूर है। बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े, क्या आपकी आंखों पर ‘मलाई’ की पट्टी बंधी है? मालाड से लेकर मुंबई के हर फुटपाथ पर ‘धर्म के व्यापारियों’ ने अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया है। फुटपाथ कम पड़े तो सड़क के आधे हिस्से तक मंडप तान दिए गए, और रही-सही कसर अवैध पार्किंग ने पूरी कर दी।
आखिर जनता कहाँ से जाए—फुटपाथ पर या मौत की राह पर?
बच्चे स्कूल जा रहे हैं, बुजुर्ग अस्पताल की राह देख रहे हैं, और महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। लेकिन उन्हें रास्ता कहाँ मिलता है? सड़क के बीच से! जहाँ तेज रफ्तार गाड़ियों का खौफ है। आपने और आपकी पूरी टीम ने इन अतिक्रमणकारियों के सामने घुटने टेक दिए हैं।
कानूनी नोटिस का असर ‘जीरो’, क्या मिलीभगत ही अब नियम है?
‘वशिष्ठ वाणी’ ने बार-बार इस मुद्दे को उठाया। हमने सबूत दिए, फोटो-वीडियो दिखाए और कानूनी नोटिस तक भेजे। लेकिन कार्रवाई? शून्य! ऐसा लगता है कि बीएमसी अधिकारियों के लिए जनता की सुरक्षा से ज्यादा इन ‘धर्म के व्यापारियों’ का अवैध कारोबार महत्वपूर्ण है।
- अश्विनी भिड़े जी, क्या आप इस शहर की व्यवस्था की प्रमुख हैं या अतिक्रमणकारियों की ‘संरक्षक’?
- आम आदमी का फुटपाथ पर हक है या सिर्फ अवैध कब्जों का?
- कार्रवाई कब होगी—जब किसी बड़े हादसे में कोई निर्दोष जान गंवाएगा?
मुंबई की सड़कों पर फैला यह ‘अवैध कब्जा’ सिर्फ अतिक्रमण नहीं, बल्कि आपके प्रशासन की विफलता का जीता-जागता सबूत है। ‘वशिष्ठ वाणी’ तब तक चुप नहीं बैठेगी जब तक आपकी नींद नहीं टूटती। अब समय जवाब मांगने का नहीं, कार्रवाई का है।
शर्म कीजिए! मलाई के चक्कर में जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करना बंद करें!











