मुंबई: मुंबई की सड़कों पर यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए ‘वशिष्ठ वाणी’ लगातार सक्रिय है। हम समय-समय पर अवैध पार्किंग और यातायात बाधाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों को सचेत करते रहे हैं। हालांकि, अक्सर यह देखने में आता है कि प्रशासनिक स्तर पर ‘कार्रवाई करने’ का दावा तो किया जाता है, लेकिन धरातल पर उसका असर नदारद होता है।
वशिष्ठ वाणी की दो-टूक माँग: पारदर्शी हो कार्रवाई का ब्यौरा
कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि ‘RTO अधिकारी उनके परिसर के पास नहीं आते’ या ‘अगर आते भी हैं तो उनके कहने पर वापस चले जाते हैं।’ यह स्थिति जनता के बीच प्रशासन की छवि को धूमिल करती है।
अतः, वशिष्ठ वाणी मुंबई RTO से निम्नलिखित सुझावों को अपनाने की अपेक्षा करती है:
- कार्रवाई का दस्तावेजीकरण (Documentation): जब भी किसी विशिष्ट स्थान पर अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई की जाए, तो उसका स्पष्ट विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- साक्ष्य आधारित रिपोर्ट: केवल ‘कार्रवाई की गई’ कहना पर्याप्त नहीं है। जनता को यह जानने का हक है कि कार्रवाई किस समय, किस स्थान पर और किन-किन वाहनों पर की गई।
- संदेह दूर करने की जिम्मेदारी: ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई वास्तव में उसी स्थल पर हुई है, जहाँ से अतिक्रमण की शिकायत मिली थी, न कि उसके आसपास के किसी अन्य स्थान पर।
जनहित में पारदर्शिता क्यों जरूरी है?
जब तक कार्रवाई का ठोस सबूत (दस्तावेज और फोटोग्राफिक साक्ष्य) जनता के सामने नहीं होगा, तब तक अवैध पार्किंग करने वालों का मनोबल बढ़ता रहेगा। वशिष्ठ वाणी का यह सुझाव जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए है।
हम प्रशासन से यह उम्मीद करते हैं कि वे एक जिम्मेदार संस्था के रूप में इस सुझाव को सकारात्मकता से लें और भविष्य की कार्यवाहियों में ‘पारदर्शिता’ को अपना मुख्य आधार बनाएँ।
वशिष्ठ वाणी का संकल्प: हम केवल कमियों को उजागर नहीं करते, बल्कि समाधान की दिशा में प्रशासन को सहयोग भी करते हैं। उम्मीद है कि मुंबई RTO हमारी इस माँग को गंभीरता से लेगा ताकि शहर की सड़कें अवैध अतिक्रमण से मुक्त हो सकें।













