मुंबई: महाराष्ट्र में शासन-प्रशासन के कामकाज और अधिकारियों की कार्यशैली पर ‘वशिष्ठ वाणी’ ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। ‘वशिष्ठ वाणी’ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक खुला पत्र लिखते हुए राज्य में प्रशासनिक सुधार के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की है।
अभिषेक अनिल वशिष्ठ (चेयरमैन, वशिष्ठ मीडिया हाउस) ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में सरकारी मशीनरी केवल मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव में काम कर रही है। सत्य पर आधारित खबरों के बाद भी कार्रवाई न होना, इस बात का प्रमाण है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
‘वशिष्ठ वाणी’ की मुख्यमंत्री से तीन प्रमुख मांगें:
- अवैध कार्यों पर ‘तत्काल कार्रवाई’ का कानून: मीडिया या नागरिकों द्वारा किसी भी अवैध कार्य (जैसे अतिक्रमण या भ्रष्टाचार) के पुख्ता प्रमाण पेश करने पर संबंधित अधिकारी को तत्काल कार्रवाई करने के लिए बाध्य किया जाए। इसमें किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।
- कार्रवाई में कोताही बरतने पर ‘सीधा निलंबन’: किसी भी अधिकारी को अब विभागीय जांच के नाम पर बचने का मौका न मिले। यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहता है, तो उसे ‘सीधा निलंबित’ (Direct Suspension) करने का नियम बनाया जाए। इससे अधिकारियों के मन में डर पैदा होगा और वे बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम कर पाएंगे।

ट्विटर/X हैंडल पर जन-सुनवाई: ‘वशिष्ठ वाणी’ ने मांग की है कि मुख्यमंत्री महोदय अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जनता और पत्रकारों की शिकायतों को सुनें। इससे न केवल जनता का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्रशासन को सीधे मुख्यमंत्री की निगरानी का एहसास होगा।
“जनता जवाब चाहती है”
‘वशिष्ठ वाणी’ के चेयरमैन अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने कहा, “अधिकारी अब नेताओं की कठपुतली बनकर न रहें। यदि आप ऐसा कानून लागू करते हैं, तो महाराष्ट्र में एक नए और पारदर्शी युग की शुरुआत होगी। हम सत्य के लिए लड़ रहे हैं और हमें विश्वास है कि मुख्यमंत्री महोदय इस जनहितकारी पहल को गंभीरता से लेंगे।”
यह मांग केवल ‘वशिष्ठ वाणी’ की नहीं, बल्कि उन लाखों नागरिकों की है जो सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर न्याय की बाट जोह रहे हैं। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।













