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वशिष्ठ वाणी का तीखा प्रहार: पीएम मोदी जी, उत्तर मुंबई के ‘लापता’ सांसद पीयूष गोयल का शर्मनाक मौन! क्या भू-माफियाओं के सामने सरेंडर कर चुके हैं केंद्रीय मंत्री?

मुंबई / नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, आपके ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ और ‘कठोर सुशासन’ के दावों की धज्जियां कहीं और नहीं, बल्कि आपके ही कैबिनेट के सबसे रसूखदार चेहरे और उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल के अपने क्षेत्र में उड़ाई जा रही हैं। यह रिपोर्ट किसी भी जनप्रतिनिधी की अंतरात्मा को झकझोरने और उन्हें शर्मिंदा करने के लिए काफी है कि कैसे लाखों वोट लेकर संसद पहुंचने वाले नेता चुनाव जीतने के बाद जनता को भू-माफियाओं के रहमों-करम पर छोड़ देते हैं।

‘वशिष्ठ वाणी’ सीधे प्रधानमंत्री जी के सामने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की इस संदेहास्पद और शर्मनाक चुप्पी का पर्दाफाश कर रहा है, जो दिल्ली में बैठकर तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन अपने ही संसदीय क्षेत्र की जनता के हक पर हो रहे डाके को देखकर ‘धृतराष्ट्र’ बने बैठे हैं।

🚨 ५३ दिनों से ‘वशिष्ठ वाणी’ की गूंज, पर पीयूष गोयल के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी!

मामला मालाड वेस्ट के भद्रन नगर (रोड नंबर १) स्थित ‘कोयला वाला गली’ का है। यहाँ रेलवे ट्रैक के बिल्कुल पास, नियमों को ताक पर रखकर एक विशाल अवैध निर्माण खड़ा किया जा रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ पिछले ५३ दिनों से लगातार इस जानलेवा अवैध निर्माण और इसके पीछे के भ्रष्टाचार को सबूतों के साथ प्रकाशित कर रहा है।

हैरत की बात यह है कि पूरे ५३ दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय सांसद पीयूष गोयल ने इस पर एक शब्द तक नहीं बोला। क्या एक केंद्रीय मंत्री के लिए स्थानीय जनता की सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मुद्दा इतना छोटा है कि उनके पास इसके लिए फुर्सत ही नहीं है? या फिर उत्तर मुंबई की जनता सिर्फ चुनाव के समय वोट बैंक के रूप में याद आती है?


📜 जब कुंदन वळवी का दफ्तर खुद मान चुका है ‘अवैध’, तो कार्रवाई रोकने वाला आका कौन?

इस मामले में सबसे शर्मनाक पहलू प्रशासनिक लाचारी है। पी/उत्तर (P/North) वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के कार्यालय से २१ मई २०२५ को ही इस अवैध निर्माण के खिलाफ आधिकारिक तौर पर हथौड़ा चलाने का नोटिस जारी किया गया था। लेकिन नोटिस जारी होने के महीनों बाद भी आज तक उस अवैध निर्माण की एक ईंट भी नहीं हिली।


अब सवाल यह उठता है कि सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के हाथ किसने बांध रखे हैं? क्या पीयूष गोयल जी का ‘मौन व्रत’ ही इस अवैध निर्माण के लिए सबसे बड़ी ढाल बन चुका है? प्रशासन का इस तरह मूकदर्शक बने रहना साफ इशारा करता है कि सेटिंग का खेल बहुत ऊपर तक जा चुका है।

🔥 पीयूष गोयल जी, दिल्ली के भाषणों से बाहर निकलिए, उत्तर मुंबई की जनता जवाब मांग रही है!

यह उत्तर मुंबई के मतदाताओं के साथ सरासर विश्वासघात है। पीयूष गोयल जी हर मंच पर प्रधानमंत्री मोदी जी के ‘नेतृत्व’ का ढोल पीटते हैं, लेकिन खुद अपने क्षेत्र में हो रहे खुलेआम अवैध निर्माणों पर आंखें मूंद लेते हैं। शायद वह भूल चुके हैं कि वह इसी जनता की बदौलत संसद की आलीशान कुर्सी पर बैठे हैं। अगर ५३ दिनों तक मीडिया के चिल्लाने और बीएमसी के नोटिस के बाद भी एक केंद्रीय मंत्री के कान पर जूं नहीं रेंगती, तो यह उनकी कार्यशैली पर सबसे बड़ा और शर्मनाक धब्बा है।

⚡ पीएम मोदी जी, अब आपके ही ‘हंटर’ की जरूरत है!

जब रसूखदार सांसद खुद को जनता के मुद्दों से ऊपर समझने लगें और अपनी ही सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के नारे को ठेंगा दिखाने लगें, तो अंतिम उम्मीद सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से बचती है।

‘वशिष्ठ वाणी’ का यह ऑन-रिकॉर्ड रिकॉर्ड और संकल्प है: हम इस भ्रष्ट तंत्र और नेताओं के इस रवैये के खिलाफ अपनी कलम की धार को कम नहीं होने देंगे। प्रधानमंत्री जी, पीयूष गोयल का यह मौन व्रत देश के सुशासन पर एक तमाचा है। अब वक्त आ गया है कि इस मामले में सीधे दिल्ली से दखल दिया जाए और कोयला वाला गली के इस अवैध निर्माण को जमींदोज कर जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिराई जाए!

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