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वशिष्ठ वाणी का तीखा प्रहार: पीएम मोदी जी, देखिए आपके नेतृत्व में सांसद पीयूष गोयल का ‘मौन व्रत’, ५३ दिन से खबर छपने के बाद भी अवैध निर्माण पर केंद्रीय मंत्री चुप!

मुंबई / नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, आपके ‘जीरो टॉलरेंस’ और सुशासन के दावों को मुंबई में आपके ही कद्दावर केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद किस तरह ठेंगा दिखा रहे हैं, यह खबर उसकी जीती-जागती मिसाल है। मुंबई का प्रशासनिक तंत्र और जन-प्रतिनिधि मिलकर किस कदर जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं, इसका पर्दाफाश एक बार फिर पुख्ता सबूतों के साथ हुआ है।

‘वशिष्ठ वाणी’ सीधे प्रधानमंत्री जी के सामने उत्तर मुंबई के सांसद और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की रहस्यमयी चुप्पी पर तीखे सवाल खड़े कर रहा है, जो दिन-रात दिल्ली में आपके नेतृत्व की दुहाई देते नहीं थकते, लेकिन अपने ही संसदीय क्षेत्र में हो रहे खुले भ्रष्टाचार पर आंखें मूंद कर बैठे हैं।

🚨 मालाड वेस्ट, भद्रन नगर: रेलवे ट्रैक के पास ‘खतरनाक’ अवैध निर्माण

मामला मालाड वेस्ट के भद्रन नगर (रोड नंबर १) स्थित ‘कोयला वाला गली’ का है। यहाँ रेलवे ट्रैक के बिल्कुल पास नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा है। यह विषय काफी पुराना और संवेदनशील है। रेलवे ट्रैक के पास इस तरह का अवैध निर्माण न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ पिछले ५३ दिनों से लगातार इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर रहा है, लेकिन रसूखदार भू-माफियाओं के आगे पूरा सिस्टम नतमस्तक है।


📜 २१ मई २०२५ को नोटिस जारी, फिर भी कार्रवाई ‘ठंडे बस्ते’ में!

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह है कि प्रशासन खुद इस निर्माण को अवैध मान चुका है। पी/उत्तर (P/North) वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के दफ्तर से बकायदा २१ मई २०२५ को इस अवैध निर्माण के खिलाफ आधिकारिक नोटिस भी जारी किया जा चुका है। लेकिन नोटिस जारी होने के महीनों बाद भी धरातल पर एक ईंट तक नहीं हटाई गई। आखिर सहायक आयुक्त कुंदन वळवी का यह नोटिस सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए था या भू-माफियाओं को सेटलमेंट का वक्त देने के लिए?


🔥 सांसद पीयूष गोयल पर सीधा कटाक्ष: क्या केंद्रीय मंत्री के लिए यह छोटा विषय है?

सांसद पीयूष गोयल दिनभर प्रधानमंत्री मोदी जी के ‘नेतृत्व’ का गुणगान करते रहते हैं, लेकिन जब उनके अपने लोकसभा क्षेत्र मालाड की जनता अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही से त्रस्त है, तो उन्होंने मौन व्रत धारण कर लिया है। ऐसा लगता है कि पीयूष गोयल को लगता है कि वह देश के केंद्रीय मंत्री और सांसद हैं, इसलिए स्थानीय जनता की समस्याएं और ये ‘छोटे विषय’ उनके रसूख के सामने कोई मायने नहीं रखते।

⚡ पीएम मोदी जी, अब आपके ही आदेश का इंतजार है!

जब स्थानीय प्रशासन (P/North वार्ड) नोटिस देकर सो जाए और इलाके के सांसद व केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ५३ दिनों की मीडिया रिपोर्टिंग के बाद भी चुप्पी साध लें, तो यह साफ है कि बिना ऊपर के डंडे के यह सिस्टम हिलने वाला नहीं है।

‘वशिष्ठ वाणी’ का यह ऑन-रिकॉर्ड संकल्प और रिकॉर्ड है: हम मंत्रियों और अधिकारियों के इस गठजोड़ के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखेंगे। प्रधानमंत्री जी, अब समय आ गया है कि आप अपने मंत्रियों को जमीनी हकीकत का आईना दिखाएं, ताकि पीयूष गोयल का यह ‘मौन व्रत’ टूटे और भद्रन नगर के इस अवैध निर्माण को जड़ से उखाड़ फेंका जाए!

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