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MHADA अधिकारियों की घोर लापरवाही: कोर्ट के डर से भी परे संतोष कांबले और रोहित शिंदे, आपातकालीन रास्ते पर अवैध कब्जा बरकरार

मुंबई (मालवणी): म्हाडा (MHADA) प्रशासन के कुछ अधिकारियों की लापरवाही और संवेदनहीनता इस कदर बढ़ चुकी है कि उन्हें न तो जनता की जान की परवाह है और न ही देश की न्यायपालिका का कोई खौफ। मालवणी के सामना नगर से एक ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ आपातकालीन रास्ते (Emergency Exit Route) को पूरी तरह से अवैध पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा बार-बार सबूतों के साथ सचेत किए जाने के बावजूद म्हाडा अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

मुख्य बिंदु: जनता की जान से खिलवाड़ का पूरा घटनाक्रम

  • अधिकारियों की चुप्पी और झूठे आश्वासन: सामना नगर मालवणी के निवासियों द्वारा जब भी आपातकालीन रास्ते पर अवैध पार्किंग का वीडियो भेजा जाता है, ‘वशिष्ठ वाणी’ उसे तुरंत म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे को फॉरवर्ड करती है, ताकि वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को जमीनी हकीकत दिखा सकें। रोहित शिंदे का हर बार एक ही रटा-रटाया जवाब आता है कि “जल्द ही लेटर जारी करेंगे”। लेकिन इस खोखले आश्वासन को आज 2 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, और लेटर आज तक जारी नहीं हुआ।
  • वरिष्ठ अधिकारियों का ‘एक्शन’ सिर्फ दावों में: रोहित शिंदे का दावा है कि जब भी वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करते हैं, तो उन पर एक्शन लिया जाता है। लेकिन धरातल पर नजारा इसके बिल्कुल उलट है। वरिष्ठ अधिकारी संतोष कांबले अपनी जगह से टस से मस होने को तैयार नहीं हैं और न ही इस संवेदनशील रास्ते को खाली करवाने में कोई रुचि दिखा रहे हैं।
  • कोर्ट के आदेशों और कानूनी कार्रवाई का भी डर नहीं: इस मामले की गंभीरता को देखते हुए म्हाडा के वाइस प्रेसिडेंट (VP) संजीव जायसवाल से लेकर अधिकारी संतोष कांबले, रोहित शिंदे और म्हाडा के उपनिबंधक (Deputy Registrar) बी. एस. कटरे के खिलाफ कोर्ट में याचिका तक दाखिल की जा चुकी है। इसके बावजूद इन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
  • सोसायटी की मिलीभगत और सुलगता खतरा: ग्राउंड जीरो से मिली तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि म्हाडा के इस मुख्य आपातकालीन रोड पर दोनों तरफ अवैध रूप से गाड़ियाँ पार्क की गई हैं। रही-सही कसर मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी ने पूरी कर दी है, जिसने बची हुई जगह पर ऑटो रिक्शा खड़े करवा दिए हैं।

बड़ा सवाल: अगर कल को इस घनी आबादी वाले क्षेत्र में कोई बड़ी आगजनी या मेडिकल इमरजेंसी जैसी दुर्घटना होती है, और फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस अंदर नहीं आ पाती, तो होने वाली जनहानि की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या कोर्ट की अवमानना करने वाले इन म्हाडा अधिकारियों पर प्रशासन कोई सख्त कार्रवाई करेगा?

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