मालाड (मुंबई): आज वशिष्ठ वाणी के खुलासे को 15 दिन पूरे हो चुके हैं। 15 दिन पहले हमने ‘कोयला वाली गली’ में रेलवे सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अवैध निर्माण की जंग शुरू की थी। लेकिन आज हम यह पूछने पर मजबूर हैं—क्या मालाड वार्ड 35 में कानून खत्म हो गया है? बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी और नगरसेवक की रहस्यमयी चुप्पी
15 दिनों से ‘वशिष्ठ वाणी’ लगातार बीएमसी के उस नोटिस को चीख-चीख कर दिखा रहा है जिसे 21 मई 2025 को जारी किया गया था। एक साल से अधिक समय बीत गया, लेकिन अधिकारी कुंदन वाल्वी की कलम कार्रवाई के लिए नहीं चली।
वशिष्ठ वाणी के कड़े सवाल:
- नगरसेवक योगेश वर्मा कहाँ हैं? क्या 15 दिन एक जनप्रतिनिधि के लिए संज्ञान लेने के लिए काफी नहीं हैं?
- सांसद पीयूष गोयल जी, क्या आपके संसदीय क्षेत्र में नियमों की धज्जियाँ उड़ाना अब आम बात हो गई है?
- कर्सन का संरक्षण कौन कर रहा है? आखिर किसके दबाव में बीएमसी का बुलडोजर ‘कोयला वाली गली’ का रास्ता भूल गया है?
जनता का आक्रोश: “अगली बार वोट मांगने मत आना”
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर मीडिया की 15 दिनों की मेहनत का असर नहीं हो रहा, तो यह प्रशासन की सबसे बड़ी विफलता है। क्या प्रशासन किसी बड़े रेल हादसे का इंतजार कर रहा है?
अंतिम चेतावनी: वशिष्ठ वाणी की यह मुहिम तब तक नहीं थमेगी जब तक उन अवैध पिलरों और दीवारों को जमींदोज नहीं किया जाता। अगर 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई, तो अब जनता के साथ मिलकर प्रशासन का घेराव किया जाएगा।










