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मालाड में कानून ‘लाचार’, मोदी हुंडई के आगे प्रशासन ‘बेअसर’; फुटपाथ पर कब्जा या अधिकारियों की मौन सहमति?

मुंबई (मालाड): मालाड वेस्ट के न्यू लिंक रोड पर स्थित Modi Hyundai Showroom के लिए क्या संविधान के नियम अलग हैं? यह सवाल आज हर उस नागरिक के मन में है जिसे फुटपाथ छोड़कर अपनी जान हथेली पर रखकर सड़क पर चलना पड़ रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार सबूतों के साथ खबरें प्रकाशित करने के बावजूद, मोदी हुंडई का फुटपाथ पर कब्जा प्रशासन के मुंह पर तमाचे जैसा है।

दिखावे की कार्रवाई और ‘सेटिंग’ का शक

हैरानी की बात यह है कि न्यूज़ प्रकाशित होने के बाद भी प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और Modi Hyundai के बीच कोई ‘अदृश्य समझौता’ है, जिसके कारण कार्रवाई केवल फाइलों तक सीमित रह जाती है। क्या बीएमसी और आरटीओ के अधिकारी केवल आम जनता का चालान काटने के लिए बने हैं? बड़े शोरूम मालिकों के सामने प्रशासन की यह “लाचारी” क्या संकेत देती है?

पैदल चलने वालों का हक ‘नीलाम’

हुंडई की चमकती गाड़ियों के बीच फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुका है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सड़क पर चलने के लिए मजबूर करना क्या किसी अपराध से कम है? यदि इस फुटपाथ पर कोई दुर्घटना होती है, तो क्या इसकी जिम्मेदारी BMC P-North Ward और ट्रैफिक पुलिस लेगी?

वशिष्ठ वाणी का संकल्प: अब सीधे बड़े अधिकारियों तक पहुंचेगी बात

‘वशिष्ठ वाणी’ ने ठाना है कि जब तक फुटपाथ आम जनता को वापस नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। अब इस मामले की शिकायत केवल स्थानीय कार्यालयों तक नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से हुंडई इंडिया के मुख्यालय (Headquarters) और मुंबई के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी।

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