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‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल: बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी, कुंभकर्ण की नींद से कब जागेंगे? क्या माफिया ‘कर्सन’ के आगे शर्म बेच खाई है?

मुंबई, मालाड (पश्चिम): सत्ता बदलती है, सरकारें बदलती हैं, और कमिश्नर भी बदल जाते हैं, लेकिन मालाड में भ्रष्टाचार की जड़ें जमाए बैठे कुछ अधिकारियों की नीयत नहीं बदलती। ‘वशिष्ठ वाणी’ आज बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी से वह सवाल पूछ रहा है, जिसे पूछने की हिम्मत शायद उनके विभाग के बड़े अधिकारी भी नहीं कर पा रहे।


कुंदन वाल्वी, जवाब दीजिए!

भदरण नगर, रोड नंबर 1, रेलवे ट्रैक के पास स्थित ‘कोयला वाली गली’ में माफिया कर्सन द्वारा खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अवैध निर्माण की ईंटें एक-एक कर आपकी नाक के नीचे चुनी जा रही हैं।

  • सवाल 1: क्या आप वाकई सो रहे हैं या माफिया की ‘चमक’ ने आपकी आँखों की रोशनी छीन ली है?
  • सवाल 2: बार-बार शिकायतें और खबरें छपने के बाद भी ‘कोयला वाली गली’ में बुलडोजर क्यों नहीं पहुँचा?
  • सवाल 3: अगर आप में थोड़ी भी प्रशासनिक ‘शर्म’ बची है, तो इस अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की तारीख मालाड की जनता को बताइए।

सिस्टम को ठेंगा दिखा रहा माफिया ‘कर्सन’

मालाड के इस हिस्से में कर्सन का रसूख इतना बढ़ गया है कि वह खुद को कानून से ऊपर समझने लगा है। लेकिन हैरानी माफिया पर नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर है जिसे चलाने की जिम्मेदारी पीयूष गोयल जैसे दिग्गज सांसद, नगरसेवक योगेश वर्मा और कमिश्नर अश्विनी भिड़े के कंधों पर है। क्या ये सभी माफिया के रसूख के सामने बौने साबित हो रहे हैं?

जनता की अदालत में कुंदन वाल्वी का न्याय

स्थानीय नागरिक अब यह पूछ रहे हैं कि क्या कुंदन वाल्वी को सिर्फ फाइलों पर हस्ताक्षर करने और शिकायतों को नजरअंदाज करने की तनख्वाह मिलती है? रेलवे ट्रैक के पास हो रहा यह निर्माण किसी बड़े हादसे की आहट है। अगर कल कोई दुर्घटना हुई, तो क्या कुंदन वाल्वी इसकी जिम्मेदारी लेंगे?

निष्कर्ष:

‘वशिष्ठ वाणी’ चुप बैठने वाला नहीं है। जब तक ‘कोयला वाली गली’ का यह अवैध ढांचा गिर नहीं जाता और दोषी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं हो जाती, हमारी कलम चलती रहेगी। कुंदन वाल्वी जी, अब वक्त आ गया है कि आप अपनी चुप्पी तोड़ें, वरना मालाड की जनता आपको ‘भ्रष्टाचार का संरक्षक’ मानने में देर नहीं करेगी।


ब्यूरो रिपोर्ट: वशिष्ठ वाणी (सच्चाई के साथ, बिना डरे)

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