मुंबई: भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही जब चरम पर होती है, तो अधिकारी जनता और मीडिया के प्रति जवाबदेह होने के बजाय अहंकारी हो जाते हैं। गोरेगांव म्हाडा के अधिकारी संतोष कांबले इसका जीता-जागता उदाहरण बन गए हैं। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा साक्ष्यों के साथ प्रकाशित खबरों पर कार्रवाई करने के बजाय, संतोष कांबले अब न्यूज़ की प्रामाणिकता को ही चुनौती दे रहे हैं।
मीडिया को चुनौती: संतोष कांबले की नई दलील
आमतौर पर न्यूज़ में सबूत आने के बाद प्रशासन स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेता है, लेकिन संतोष कांबले ने एक नया तर्क दिया है। उनका कहना है कि “न्यूज़ में पब्लिश करने से कुछ नहीं होगा, आप लिखित शिकायत करेंगे तभी कुछ होगा।” अब सवाल यह उठता है कि:
- क्या संतोष कांबले के लिए समाचार पत्र में छपे सबूत और वीडियो साक्ष्य कोई मायने नहीं रखते?
- क्या ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा दिखाई गई ‘ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी’ के अवैध शेड और समाना नगर का ब्लॉक रास्ता उन्हें बिना लिखित पत्र के दिखाई नहीं देता?
- क्या अब मीडिया न्यूज़ भी पब्लिश करे और अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटकर लिखित शिकायतें भी दर्ज कराए?
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इमरजेंसी रास्ता ब्लॉक, सुरक्षा खतरे में

मामला यहीं नहीं रुकता। ‘वशिष्ठ वाणी’ ने संतोष कांबले (म्हाडा क्षेत्र निर्माण, गोरेगांव) को एक वीडियो साक्ष्य के रूप में साझा किया था, जिसमें स्पष्ट दिख रहा है कि समाना नगर में फेडरेशन के अध्यक्ष ने अपनी ऑटो रिक्शा पार्क करने के लिए आपातकालीन (Emergency) रास्ते को दोनों तरफ से बंद कर दिया है।

- स्थानीय लोगों का आरोप है कि संतोष कांबले की मिलीभगत के कारण ही दबंग लोग आम रास्तों पर कब्जा कर रहे हैं।
- यह रास्ता किसी भी अनहोनी या आग लगने की स्थिति में बेहद महत्वपूर्ण है।
- संतोष कांबले को वीडियो सौंपे जाने के बाद भी सड़क आज भी ब्लॉक है।
साक्ष्यों को दरकिनार कर अवैध निर्माण को संरक्षण?

मालवणी में पुराने टैंक पर बना सीमेंट का अवैध ओपन शेड सीधे तौर पर म्हाडा के ब्लूप्रिंट का उल्लंघन है। इसी तरह समाना नगर में फेडरेशन अध्यक्ष द्वारा आपातकालीन रास्ते पर अपनी ऑटो रिक्शा पार्क करना सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

इन दोनों ही गंभीर मामलों में संतोष कांबले को वीडियो और न्यूज़ क्लिप भेजी गई, लेकिन उनका “कुर्सी का घमंड” कार्रवाई के आड़े आ रहा है।
“न्यूज़ से नहीं डरता”: संतोष कांबले का अहंकारी बयान
जब पत्रकारिता के माध्यम से जनता की समस्याओं को संतोष कांबले के सामने लाया गया, तो उन्होंने ऑन-रिकॉर्ड बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया। संतोष कांबले ने स्पष्ट कहा कि, “न्यूज़ में प्रकाशित होने के कारण वह कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।” एक सरकारी पद पर बैठे अधिकारी का यह बयान लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) का अपमान तो है ही, साथ ही यह उनकी कार्यशैली में व्याप्त भ्रष्टाचार और तानाशाही को भी दर्शाता है।
भ्रष्ट तंत्र पर कार्रवाई कौन करेगा?
संतोष कांबले जैसे अधिकारियों का यह व्यवहार बताता है कि उन्हें न तो नियमों का डर है और न ही अपनी छवि की चिंता। जब अधिकारी न्यूज़ देखने के बाद भी कार्रवाई से मना कर दें, तो यह साफ है कि वह अपराधियों या अवैध निर्माण करने वालों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दे रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार और म्हाडा मुख्यालय के लिए बड़ा सवाल:
क्या म्हाडा प्रशासन ऐसे ढीठ अधिकारियों पर लगाम लगाएगा जो खुलेआम कहते हैं कि उन्हें न्यूज़ से कोई फर्क नहीं पड़ता? क्या संतोष कांबले के इस “ऑन-रिकॉर्ड” अहंकार पर वरिष्ठ अधिकारी संज्ञान लेंगे, या फिर जनता इसी तरह भ्रष्टाचार की बलि चढ़ती रहेगी?
पत्रकार की कलम से:
प्रशासन की इस चुप्पी और संतोष कांबले की मनमानी के खिलाफ ‘वशिष्ठ वाणी’ अपनी मुहीम जारी रखेगी। जब तक सुरक्षा से खिलवाड़ और अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं होती, हम सवाल पूछते रहेंगे।










