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वाराणसी: दालमंडी सड़क चौड़ीकरण में तेज़ी, ऐतिहासिक बाजार पर संकट गहराया

  • प्रहलाद पांडे की विशेष रिपोर्ट

वाराणसी/वशिष्ठ वाणी। दालमंडी—वाराणसी का सबसे पुराना और घनी आबादी वाला व्यापारिक इलाक़ा—इन दिनों सड़क चौड़ीकरण अभियान के कारण भारी तनाव में है। शुक्रवार को प्रशासन ने अभियान को आगे बढ़ाते हुए छह और भवनों पर कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस बल की बड़ी तैनाती की गई, ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कई दुकानों को अवैध निर्माण घोषित कर तोड़ा जा रहा है और कुछ व्यापारियों को मोहनसराय स्थानांतरित होने के लिए कहा गया है। व्यापारियों का कहना है कि नई जगह व्यापार के लिए उपयुक्त नहीं है, जिससे उनका व्यवसाय पूरी तरह टूटने का खतरा है।


व्यापारियों और प्रशासन में बढ़ा तनाव

शुक्रवार को हुई कार्रवाई के दौरान कई दुकानदारों ने विरोध जताया। ADM सिटी आलोक वर्मा की टीम जब दुकानों को खाली कराने पहुंची तो स्थानीय लोगों के साथ तनावपूर्ण स्थिति और धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई।
एक दुकानदार ने कहा—

“अगर मेरा घर तोड़ दिया गया, तो 14 लोग सड़क पर आ जाएंगे।”

वहीं, एक युवक को विरोध के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया।
पूर्व मंत्री मनोज राय ने कार्रवाई को “सरकार द्वारा आजीविका छीनने का प्रयास” बताया और इसे पूर्णतः अनुचित कहा।


दालमंडी की ऐतिहासिक दुकानों पर खतरा

दालमंडी वाराणसी का वह इलाका है जहां करीब 1500 दुकानें हैं, जिनमें से कई दुकानें आज़ादी से पहले की विरासत हैं।
यहाँ की ऐतिहासिकता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि यहाँ काशी नरेश के राजा कटरा क्षेत्र की 11 दुकानें आज भी मौजूद हैं, जो लगभग 100 वर्ष पुरानी हैं। इन दुकानों का किराया आज भी काशी नरेश परिवार के मुंशी के माध्यम से ही वसूला जाता है।

  • एक दुकानदार राशिद ने बताया कि उनके पिता ने दुकान 500 रुपये मासिक किराए पर ली थी, और वर्षों बाद भी किराया नाममात्र ही है।
  • वहीं, वकील अहमद की दुकान का इतिहास और भी दिलचस्प है। उनके दादा ने 1952 में 3 रुपये किराए पर दुकान ली थी जो 1963 में 14 रुपये, और अब 700 रुपये मासिक हो गया है।

इन दुकानों पर अब सड़क चौड़ीकरण का सीधा असर पड़ रहा है, जिससे व्यापारी बेहद चिंतित हैं।


प्रशासन का दावा—सहमति प्रक्रिया जारी

प्रशासन के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण परियोजना में कुल 181 भवन प्रभावित हो रहे हैं।
इनमें से 5 की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, जबकि 13 काश्तकार अब तक प्रशासनिक प्रक्रिया में सहमति जता चुके हैं।

अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से इलाके की आवाजाही और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन प्रभावित लोगों को नियमों के अनुसार विकल्प और मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाएगा।


व्यापारियों का आरोप — “बिना व्यवस्था उजाड़ने का प्रयास”

स्थानीय व्यापारी संगठन का कहना है कि प्रशासन पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे, तभी किसी भी प्रकार की तोड़-फोड़ उचित होगी।
व्यापारियों का तर्क है—

“यह क्षेत्र सिर्फ बाज़ार नहीं, काशी की सांस्कृतिक धरोहर है।
इसे बिना ठोस योजना के उजाड़ना न्यायसंगत नहीं।”

विरोध को देखते हुए व्यापारी संगठन ने शनिवार को बड़े धरने की घोषणा की है।


सवाल बरकरार — विकास या विरासत का नुकसान?

दालमंडी वाराणसी की आर्थिक धड़कन मानी जाती है।
यहां का व्यवसाय, पुरानी गलियों की संरचना और ऐतिहासिक दुकानों की विरासत मिलकर इसे सांस्कृतिक पहचान देते हैं।

सड़क चौड़ीकरण से जहां शहर को सुगमता मिलेगी, वहीं कई पुरानी यादें, व्यापार और पीढ़ियों की आजीविका दांव पर है।

अब देखने वाली बात यह है कि आने वाले दिनों में—
  • क्या व्यापारी और प्रशासन किसी समझौते पर पहुंचेंगे,
    या
  • फिर बुलडोज़र की गूंज दालमंडी की पुरानी इमारतों को इतिहास बना देगी?

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