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वशिष्ठ वाणी का महा-असर: खबर छपते ही प्रशासन में हड़कंप, पीड़ित महिला को न्याय दिलाने खुद मौके पर पहुंचे डिप्टी कलेक्टर

मुंबई, मालाड (प.): ‘चौथा स्तंभ’ जब अपनी ताकत पर आता है, तो सालों से कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन भी चौबीस घंटे के भीतर जागने पर मजबूर हो जाता है। कुछ ऐसा ही बड़ा असर देखने को मिला है मुंबई के मालाड (पश्चिम) इलाके में, जहाँ ‘वशिष्ठ वाणी’ में खबर प्रकाशित होते ही प्रशासनिक अमला न सिर्फ हरकत में आया, बल्कि खुद वरिष्ठ अधिकारी को जमीन पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।


क्या है पूरा मामला?

योगाश्रम, बुल्लर गार्डन, एरंगळ विलेज, दाणापाणी, मालाड (प.) की निवासी नेहा निलेश वालावलकर पिछले कई महीनों से अपने ही घर से बाहर निकलने के रास्ते के लिए सिस्टम के आगे गुहार लगा रही थीं। इलाके के कुछ रसूखदार दबंगों ने इस कदर तानाशाही मचा रखी थी कि महिला के घर का मुख्य रास्ता पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया था। आलम यह था कि अपनी ही जमीन और घर होने के बावजूद पीड़ित महिला को एक साल तक किराए के मकान में दर-दर भटकना पड़ा।


जब महिला अपने घर वापस लौटी, तो उन्हें जिस वैकल्पिक रास्ते से गुजरना पड़ता था, वह इतना संकरा और खतरनाक था कि वहाँ हर वक्त जान का जोखिम बना रहता था। सिर के ठीक ऊपर बिजली और केबल के खुले तार लटके हुए थे, जहाँ से रोज गुजरना मौत को दावत देने जैसा था।

साल भर बीएमसी और कलेक्टर ऑफिस के चक्कर, पर सिस्टम रहा मौन

पीड़ित महिला ने न्याय की आस में पिछले एक साल से बीएमसी (BMC) ऑफिस और कलेक्टर (मुंबई उपनगर) कार्यालय के अनगिनत चक्कर काटे। दर्जनों शिकायतें दीं, हर अधिकारी की चौखट पर माथा टेका, लेकिन भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुस्ती के आगे इस बेबस महिला की आवाज दबा दी गई। कोई भी अधिकारी दबंगों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

जब ‘वशिष्ठ मीडिया हाउस’ ने संभाली कमान

जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब पीड़ित महिला ने वशिष्ठ मीडिया हाउस के निदेशक और समूह दैनिक समाचार पत्र के मालिक अभिषेक अनिल वशिष्ठ से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई और इस गंभीर विषय को उठाने का अनुरोध किया।

जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को सर्वोपरि मानते हुए, ‘वशिष्ठ वाणी’ ने इस मुद्दे को पूरी प्रखरता और प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया। खबर के जरिए यह साफ कर दिया गया कि रसूखदारों की गुंडागर्दी के आगे एक आम नागरिक के अधिकारों को कुचला नहीं जा सकता।

खबर का धमाका: अगले ही दिन दौड़े आए अधिकारी

‘वशिष्ठ वाणी’ में खबर छपते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। जो अधिकारी महीनों से फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे थे, वे 24 घंटे के भीतर एक्टिव हो गए। खबर का बड़ा असर यह हुआ कि गोरेगांव के डिप्टी कलेक्टर विनायक अगले ही दिन खुद पूरी टीम के साथ मौके पर (ग्राउंड ज़ीरो) पहुंचे। उन्होंने स्थिति का मुआयना किया और पीड़ित महिला को हर हाल में न्याय दिलाने तथा रास्ता बहाल कराने की ठोस कार्रवाई शुरू कर दी।

वशिष्ठ वाणी का संकल्प: जनता की मुसीबत में हम बनेंगे आपकी ढाल

यह कोई पहली बार नहीं है जब ‘वशिष्ठ वाणी’ आम जनता के हक की लड़ाई में सबसे आगे खड़ी हुई है। हमारा एकमात्र मकसद समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद करना और व्यवस्था की कमियों को उजागर करना है।

“सामने चाहे कोई रसूखदार नेता हो, ताकतवर मंत्री हो या फिर बेलगाम हो चुके सरकारी अधिकारी—’वशिष्ठ वाणी’ हर उस शख्स से तीखे सवाल पूछेगा जो अपनी जिम्मेदारी से भागेगा। जनता अगर परेशान होगी, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ अपनी पूरी ताकत झोंककर उनकी आवाज बनेगा।”

अगर आप भी किसी भ्रष्टाचार, अवैध कब्जे, या प्रशासनिक लापरवाही के शिकार हैं, तो घबराइए मत। ‘वशिष्ठ वाणी’ आपकी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी मजबूती के साथ आपके साथ खड़ा है।

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