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मलाड वेस्ट में भीषण हादसा: आरोपी को पुलिस की ‘VIP ट्रीटमेंट’ का आरोप, लोगों में भारी आक्रोश!

मुंबई/वशिष्ठ वाणी। मलाड वेस्ट में 30 अगस्त 2026 की रात एक दर्दनाक और भयावह सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। रात करीब 8 बजे S.V. रोड स्थित मामलतदार वाड़ी रोड सिग्नल के पास तेज रफ्तार कार ने सड़क पर मौजूद करीब 20 लोगों को जोरदार टक्कर मार दी।

हादसे में 2 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति के सिर में करीब 20 टांके लगे हैं। इसके अलावा कई अन्य नागरिक भी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

मृतकों में मलाड वेस्ट निवासी एडवोकेट प्रियंका मयंक सतरा भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान कार का पहिया उनके शरीर के ऊपर से गुजर गया, जिससे उनकी मौके पर ही बेहद दर्दनाक मौत हो गई।

🚨 मलाड पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

हादसे के बाद रात करीब 11:30 बजे मृतक एडवोकेट प्रियंका के परिवारजन, मित्र और अन्य नागरिक FIR दर्ज कराने के लिए मलाड वेस्ट पुलिस स्टेशन पहुंचे।

परिजनों और मौजूद लोगों का आरोप है कि पुलिस की ओर से आरोपी के खिलाफ तत्काल अपेक्षित कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही थी।

पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर देखे गए घटनाक्रम को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

1. आरोप है कि आरोपी को लॉकअप में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई और बैठने के लिए कुर्सी भी उपलब्ध कराई गई।

2. रात करीब 1:20 बजे वर्सोवा इलाके से एक महिला पुलिस अधिकारी के पुलिस स्टेशन पहुंचने की बात सामने आई है।

3. आरोप है कि ‘मेडिकल चेकअप’ के नाम पर आरोपी को लॉकअप से बाहर निकालकर पुलिस स्टेशन के पीछे स्थित AC कमरे में बैठाया गया।

4. जब परिजनों ने आरोपी के बारे में जानकारी मांगी, तो कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि आरोपी को मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया है।

इन आरोपों के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या आरोपी के वर्सोवा/अंधेरी क्षेत्र का निवासी होने के कारण उसे पुलिस प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ या विशेष सुविधा दी जा रही थी? हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

🔴 उठ रही हैं ये प्रमुख मांगें

1. आरोपी के खिलाफ कानून के तहत उचित और कड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए और दोष सिद्ध होने पर कठोरतम कानूनी सजा सुनिश्चित की जाए।

2. आरोपी को कथित VIP ट्रीटमेंट देने या किसी भी प्रकार की अनुचित मदद करने के आरोपों की स्वतंत्र और गहन जांच की जाए। दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

3. हादसे और उसके बाद पुलिस स्टेशन में हुई गतिविधियों से संबंधित उस रात के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए और जांच के दौरान आवश्यकता के अनुसार संबंधित अधिकारियों/जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

मलाड वेस्ट के इस दर्दनाक हादसे ने पुलिस कार्रवाई और आरोपी के साथ कथित व्यवहार को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मृतक एडवोकेट प्रियंका सतरा और अन्य घायलों के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।

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