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म्हाडा अधिकारियों की ‘कुर्सी’ से चिपकी खाल: जनता त्रस्त, भ्रष्टाचार मस्त!

मुंबई (मालवणी): क्या सरकारी कुर्सी पर बैठते ही अधिकारियों की संवेदनाएं मर जाती हैं? यह सवाल आज मालवणी, गेट नंबर 8, समना नगर के निवासी पूछ रहे हैं। आरोप है कि म्हाडा अधिकारी संतोष कांबले अपनी वातानुकूलित कुर्सी छोड़कर धरातल पर आने को तैयार नहीं हैं।


ग्राउंड जीरो की हकीकत: अवैध निर्माण का बोलबाला

समना नगर में अवैध निर्माणों ने मकड़जाल की तरह पूरे इलाके को जकड़ लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने बार-बार शिकायतें कीं, लेकिन अधिकारी कांबले ने न तो मौके पर आकर जांच की और न ही इन अवैध ढांचों पर कोई कार्रवाई की। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि अधिकारी की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है?


आपातकालीन रास्ते बंद: क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

सबसे डराने वाली बात यह है कि इन अवैध निर्माणों की वजह से आपातकालीन रास्ते (Emergency Routes) पूरी तरह ब्लॉक हो चुके हैं। यदि कल को इलाके में कोई आग लगती है या मेडिकल इमरजेंसी होती है, तो एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का अंदर घुसना नामुमकिन है।


बेशर्म तंत्र पर जनता का प्रहार

स्थानीय निवासियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। लोगों का कहना है— “इन बेशर्म अधिकारियों की शिकायत करें भी तो कहाँ? क्या गारंटी है कि कार्रवाई होगी या हमारी शिकायत रद्दी की टोकरी में फेंक दी जाएगी?” जनता का यह डर जायज है क्योंकि वर्तमान हालात चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यहाँ नियम-कानून नहीं, बल्कि अधिकारियों और भू-माफियाओं की साठगांठ चल रही है।

हमारा सवाल:

  • क्या मुख्यमंत्री और म्हाडा के उच्च अधिकारी संतोष कांबले जैसे लापरवाह अधिकारियों पर नकेल कसेंगे?
  • क्या समना नगर की जनता को सुरक्षित रास्ता मिलेगा या प्रशासन किसी बड़ी जान-माल की हानि का इंतजार कर रहा है?

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