लोकप्रिय विषयमहाराष्ट्रसम्पादकीयकवितास्वास्थ्यअपराधअन्यवीडियो

24 सितंबर से 30 सितंबर: बीएमसी और तुकाराम मुंढे की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल, क्या भ्रष्ट व्यवस्था के आगे लाचार है प्रशासन?

विशेष संवाददाता

मुंबई। मालाड (पश्चिम) स्थित लिबर्टी बार के पास कमर्शियल इमारत के मुख्य प्रवेश द्वार को घेरकर चलाए जा रहे ‘श्रीनाथ डोसा’ (Shreenath Dosa) के अवैध कब्जे और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा 24 सितंबर 2026 को बीएमसी (BMC) प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंढे से सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों के माध्यम से तीखे सवाल पूछे गए थे।

आज 30 सितंबर 2026 हो चुका है, पूरे 6 दिन बीत जाने के बाद भी न तो बीएमसी पी-नॉर्थ (P-North) वार्ड की तरफ से कोई जवाब आया और न ही खाद्य सुरक्षा विभाग या तुकाराम मुंढे की ओर से कोई संज्ञान लिया गया। बीएमसी अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी इस बात पर मुहर लगाती है कि जब तक प्रशासन में भ्रष्ट अधिकारी बैठे हैं, तब तक अवैध कारोबार इसी तरह बेधड़क फलता-फूलता रहेगा।

बीएमसी और प्रशासनिक तंत्र पर सीधे कड़े प्रहार

1. बिना लाइसेंस चल रहा है रेस्तरां: बीएमसी बोली—’चलने दो!’

‘वशिष्ठ वाणी’ के खुलासे के बाद भी बीएमसी ने यह साफ करने की ज़हमत नहीं उठाई कि ‘श्रीनाथ डोसा’ के पास वैध ट्रेड व हेल्थ लाइसेंस है या नहीं। कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों ने आंखें मूँद रखी हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि बीएमसी का नया संदेश यही है—“बिना लाइसेंस के रेस्तरां चल रहा है तो चलने दो, हमें तो अपनी साठगांठ से मतलब है!”

2. लॉक कर दिया गया इमरजेंसी फायर एग्जिट: ‘करने दो, किसी हादसे का इंतजार करो!’

इमारत का मुख्य प्रवेश और निकास द्वार (Fire Exit), जो किसी भी आपातकालीन आगजनी की स्थिति में लोगों की जान बचाने का एकमात्र रास्ता है, उसे इस डोसा सेंटर ने पूरी तरह ब्लॉक कर रखा है। ‘महाराष्ट्र फायर प्रिवेंशन एक्ट’ की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन फायर ब्रिगेड और बीएमसी प्रशासन की खामोशी बता रही है कि उन्हें किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार है।

3. तुकाराम मुंढे से तीखा सवाल: क्या सिर्फ पब्लिसिटी वाले मुद्दों पर ही होगी कार्रवाई?

24 सितंबर को ‘वशिष्ठ वाणी’ ने बीएमसी के चर्चित अधिकारी तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) को टैग कर सीधे हस्तक्षेप की मांग की थी। लेकिन 30 सितंबर तक उनकी ओर से कोई कार्रवाई न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

  • क्या कड़क और ईमानदार छवि का ढोल पीटने वाले अधिकारी केवल उन्हीं मामलों में कार्रवाई करते हैं जहाँ उन्हें मीडिया अटेंशन और पब्लिसिटी मिलती है?
  • क्या आम जनता के जीवन से खिलवाड़ कर रहे इस ज़मीनी भ्रष्टाचार और अवैध कब्जे का मुद्दा उनके लिए मायने नहीं रखता?

‘वशिष्ठ वाणी’ का संकल्प

बीएमसी पी-नॉर्थ वार्ड की MARG प्रणाली में दर्ज शिकायत संख्या PW_202600113149 सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है। यदि बीएमसी के भ्रष्ट अधिकारियों को लगता है कि उनकी चुप्पी से यह मुद्दा ठंडा पड़ जाएगा, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है।

‘वशिष्ठ वाणी’ इस अवैध कब्जे, बिना लाइसेंस की कार्यप्रणाली और फायर एग्जिट को ब्लॉक किए जाने के मुद्दे को लगातार उजागर करता रहेगा। जब तक बीएमसी के जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन की गाज़ नहीं गिरती और इस अवैध ढांचे पर बुलडोजर नहीं चलता, हमारी यह कानूनी और पत्रकारिता की जंग जारी रहेगी!

नोट: यह रिपोर्ट जनहित, पूर्व प्रकाशित समाचार, बीएमसी की MARG प्रणाली (Complaint ID: PW_202600113149) और 24 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक प्रशासनिक चुप्पी पर आधारित है। हमारा संस्थान सार्वजनिक सुरक्षा के हित में पारदर्शी जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग करता है।

Join WhatsApp

Join Now

और पढ़ें

भूमि पार्क रोड पर ‘गैस एजेंसी’ का कब्जा! कांदिवली ट्रैफिक की मिलीभगत पर जनता का तीखा प्रहार— “दलालों की मलाई के आगे क्या जमीर बेच चुके हैं ये अधिकारी?”

बीएमसी की गहरी चुप्पी और फ्लैग रेस्टोरेंट का ‘रहस्यमयी खेल’: आखिर छत को प्लास्टिक से कवर करने की छूट किसने दी? सवालों के घेरे में प्रशासन की साठगांठ!

अधिकारी रोहित शिंदे और संतोष कांबले की लापरवाही बेनकाब: सामना नगर गेट नंबर 8 की जनता का सवाल— “क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगा म्हाडा प्रशासन?”

शिकायत दर्ज कराने के बाद भी बीएमसी की रहस्यमयी खामोशी: क्या पी-नॉर्थ वार्ड की कार्रवाई सिर्फ कागजी? ‘वशिष्ठ वाणी’ के सवालों पर तुकाराम मुंढे भी मौन!

कोर्ट के समन के बाद भी म्हाडा बेपरवाह: मालवणी गेट 8 का आपातकालीन रास्ता बना ‘ऑटो स्टैंड’, अधिकारी रोहित शिंदे का 6 महीने से एक ही रटा-रटाया जवाब— ‘लेटर तैयार है, साइन बाकी है!’

कागजी कार्रवाई या महज छलावा? बीएमसी अधिकारी प्रवीण वाघेला की सख्ती के कुछ ही घंटों बाद जन कल्याण नगर के फुटपाथ पर फिर सजा अवैध सब्जी बाजार!

Leave a Comment