मुंबई पुलिस की ‘मनमानी’ और ‘दोस्ती की दीवार’: पेड़ों की जड़ें कटीं, लेकिन कार्रवाई की जड़ें सूखीं
Mumbai News: जिस मुंबई पुलिस को “सिटीजन फ्रेंडली फोर्स” और “शील्ड ऑफ मुंबई” कहा जाता है, उसी की मालवणी पुलिस चौकी में पिछले कई महीनों से एक ऐसा खेल चल रहा है जिसमें न कानून की चलती है, न पर्यावरण की, और न ही आम नागरिक की। सिर्फ “दोस्ती” और “मनमानी” की चलती है। मामला इतना गंभीर है कि बार-बार शिकायतों, डीसीपी के आश्वासन और वकील के पत्र के बावजूद दो आरोपी अधिकारी – पुलिस अधिकारी अमृता देशमुख और PSI प्रफुल – आज भी उसी कुर्सी पर आराम से बैठे हैं, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
क्या हुआ था मूल घटना में?
मालाड (पश्चिम) के मालवणी गेट नंबर 8 के सामने स्थित सामना नगर में “डॉ. अब्दुल कलाम एज्युकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी” के नाम से चलने वाली एक फेडरेशन ने अपनी सोसाइटी की कंपाउंड दीवार बनाने के नाम पर कई पेड़ों की जड़ें काट डालीं। यह काम इतनी बेरहमी से किया गया, जैसे फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव को किसी का डर नहीं हो..!
इलाके के जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल को जब यह बात पता चली तो उन्होंने तुरंत बीएमसी के P/नॉर्थ वार्ड कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। बीएमसी के सहायक अभियंता और जूनियर ट्री ऑफिसर ने मौके पर जाकर जांच की और पाया कि वाकई बिना अनुमति के पेड़ों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। बीएमसी ने तत्काल मालवणी पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि IPC की धारा 427 (संपत्ति को नुकसान) और पर्यावरण संबंधी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।

पुलिस का “तीन महीने का विश्राम”
बीएमसी की शिकायत आने के बावजूद मालवणी पुलिस ने पूरे तीन महीने तक मामला ठंडे बस्ते में डाल कर रखा। आखिरकार दबाव बढ़ने पर सिर्फ एक NC (नॉन-कॉग्निजेबल) दर्ज की गई – वह भी सिर्फ कागजों पर। FIR दर्ज करना तो दूर की बात है।
जब सम्राट बागुल और अन्य नागरिकों ने बार-बार स्टेशन जाकर पूछा कि NC में इतनी देरी क्यों हुई, तो जो जवाब मिला वह हैरान करने वाला था।
पुलिस अधिकारी अमृता देशमुख का बयान (क्या मैं सिर्फ इसी कार्य के लिए बैठी हूं,), जब संसद वाणी और वशिष्ठ वाणी दैनिक समाचार पत्र के संवाददाता द्वारा अमृता देशमुख से सवाल किया तो उनका जवाब पहले तो काफी गुस्सा भरा रहा फिर, उन्होंने कहा “ये PSI प्रफुल का केस है। मैंने तो सिर्फ उनकी दोस्ती निभाने के लिए NC फाइल कर दी थी।”मतलब साफ था – कानून से ज्यादा महत्वपूर्ण थी “दोस्ती”।
डीसीपी तक पहुँची शिकायत, पर कुर्सियाँ नहीं हिलीं
परेशान होकर सम्राट बागुल खुद बोरीवली के डीसीपी कार्यालय गए और पूरी फाइल के साथ मौखिक व लिखित शिकायत की। डीसीपी ने तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया और कहा कि “मामले को गंभीरता से लिया जाएगा”। लेकिन आज 3 महीने बाद भी न तो कोई विभागीय जांच हुई, न अमृता देशमुख और न ही PSI प्रफुल पर कोई कार्रवाई। दोनों अधिकारी रोजाना उसी स्टेशन में ड्यूटी करते दिख जाते हैं – जैसे उन्हें किसी का कोई डर ही नहीं।
वकील ने भी लिखा पत्र, पर “उच्च अधिकारी” सोते रहे
मामला जब मीडिया में भी आया तो वशिष्ठ वाणी और संसद वाणी डिजिटल मीडिया के लीगल एडवाइजर एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा ने मुंबई पुलिस कमिश्नर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिम क्षेत्र) और जोन-11 और डीसीपी को विधिवत पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की विभागीय जांच और दोनों अधिकारियों के निलंबन की मांग की। पत्र में साफ लिखा गया था कि यह सिर्फ एक पेड़ कटाई का मामला नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारियों द्वारा जानबूझकर सबूत दबाने और पर्यावरण अपराध को संरक्षण देने का मामला है।
जवाब? आज तक कोई नहीं।
सामना नगर में रहने वाली जनता और मीडिया/सामाजिक कार्यकर्ता के सवाल अब खुलकर सामने आ रहे हैं
- जब बीएमसी ने लिखित शिकायत कर दी थी, तो NC दर्ज करने में तीन महीने क्यों लगे?
- क्या पुलिस स्टेशन में “दोस्ती” के आधार पर केस दबाए जा सकते हैं?
- डीसीपी का “कार्रवाई का आश्वासन” सिर्फ औपचारिकता था या वाकई कोई कार्रवाई हुई?
- जब वरिष्ठ अधिकारी भी चुप हैं, तो आम नागरिक अपनी शिकायत लेकर कहाँ जाए?
अंत में एक कटाक्ष
मुंबई पुलिस का नया नारा शायद अब यह होना चाहिए:
“सुरक्षा आपकी, दोस्ती हमारी – देरी तीन महीने, जवाबदेही जीरो।”
पेड़ों की जड़ें काटने वालों को बचाने में पुलिस ने जो फुर्ती दिखाई, काश अपराधियों को पकड़ने में भी वही जोश दिखाती। मालवणी पुलिस चौकी आज मुंबई के लिए एक आईना बन गई है – जिसमें नजर आता है कि अगर आपका “दोस्त” पुलिस में है, तो आप पेड़ काटें, दीवार तोड़ें या कुछ भी करें – कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।अब देखना यह है कि मुंबई पुलिस के सबसे उच्च अधिकारी इस “शर्मनाक दोस्ती” पर चुप्पी तोड़ेंगे या यूं ही “उच्च स्तरीय जांच” के नाम पर फिर महीनों गुजार देंगे।
फिलहाल तो मालवणी के पेड़ और जनता की उम्मीदें – दोनों सूख रहे हैं।


