मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मालाड वेस्ट के भाद्रन नगर (वार्ड 35) में जो कुछ भी हो रहा है, वह न केवल चौंकाने वाला है बल्कि स्थानीय राजनीति के गिरते स्तर का प्रमाण भी है। एक तरफ रेलवे ट्रैक के पास भू-माफिया कर्सन का अवैध साम्राज्य खड़ा हो रहा है, तो दूसरी तरफ इसी का विरोध करने वाले पूर्व बीजेपी वार्ड अध्यक्ष जिग्नेश परमार पर जानलेवा हमला कर दिया गया। लेकिन सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले पर स्थानीय नगरसेवक योगेश वर्मा की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर ‘एक्टिव’, ज़मीनी मुद्दे पर ‘मौन’?
वशिष्ठ वाणी की पड़ताल में सामने आया है कि नगरसेवक योगेश वर्मा ने पिछले दिनों (8 फरवरी) ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अन्य क्षेत्रों में हुए अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण की तस्वीरें बड़े गर्व से साझा की थीं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब उनके अपने ही क्षेत्र—भाद्रन नगर रोड नंबर 1, कोल्सा वाला गली—में माफिया कर्सन सरेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहा है, तो योगेश वर्मा की चुप्पी का क्या मतलब निकाला जाए?
क्या जिग्नेश परमार का खून इतना सस्ता है?
जिग्नेश परमार, जो खुद बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं, उन पर हुए हमले ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। माफियाओं ने उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की, मगर स्थानीय नगरसेवक का इस पर एक भी शब्द न बोलना कई संदेह पैदा करता है। क्या नगरसेवक को अपने ही कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की चिंता नहीं है? या फिर भू-माफिया कर्सन के रसूख के आगे नगरसेवक ने भी चुप्पी साधना ही बेहतर समझा है?
वशिष्ठ वाणी की नगरसेवक से सीधी मांग:
- योगेश वर्मा जी, आप अपनी चुप्पी कब तोड़ेंगे? क्या आपके क्षेत्र में माफिया का राज चलेगा या कानून का?
- जिस अधिकारी कुंदन वळवी के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए, उस पर आप दबाव क्यों नहीं बना रहे?
- क्या आप भू-माफिया कर्सन के इस अवैध निर्माण को ध्वस्त कराने के लिए मेयर और कमिश्नर से मांग करेंगे?
निष्कर्ष: जनप्रतिनिधि का काम केवल फोटो खिंचवाना नहीं, बल्कि अपनी जनता और कार्यकर्ताओं के लिए ढाल बनना है। वशिष्ठ वाणी तब तक इस मुद्दे को नहीं छोड़ेगा जब तक योगेश वर्मा अपनी जवाबदेही तय नहीं करते और कर्सन के अवैध निर्माण पर बुलडोजर नहीं चलता।









