मुंबई / नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, एक तरफ आप देश में ‘सुरक्षित भारत’ और ‘डिजिटल गवर्नेंस’ का विजन लेकर चल रहे हैं, तो दूसरी तरफ आपके ही नेतृत्व वाली राज्य सरकार के मुखिया जनता की जान को हथेली पर लेकर तमाशा देख रहे हैं। मुंबई के कांदिवली वेस्ट का एकता नगर रोड आज किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, और सबसे शर्मनाक बात यह है कि सबूतों के साथ लगातार ग्राउंड रिपोर्टिंग दिखाने के बाद भी महाराष्ट्र का प्रशासनिक अमला और गृह मंत्रालय गहरी नींद में सोया हुआ है।
🚨 २४ घंटे रोड ब्लॉक, २५ हजार जिंदगियां दांव पर!
कांदिवली वेस्ट के एकता नगर रोड की हकीकत यह है कि यहाँ भारत गैस एजेंसी ने सरेआम कानून की धज्जियां उड़ा रखी हैं। सार्वजनिक सड़क को ही गैस एजेंसी ने अपना ‘खुला गोदाम’ बना दिया है, जहाँ सिलेंडर से लदे लगभग १४ बड़े वाहन २४ घंटे अवैध रूप से खड़े रहते हैं।
इस घनी आबादी वाले इलाके में २० से २५ हजार लोग निवास करते हैं। जरा सोचिए, यदि किसी शरारती तत्व ने कोई छोटी सी भी हरकत की, या बीड़ी-सिगरेट की एक चिंगारी भी वहाँ पहुँची, तो पल भर में पूरा इलाका श्मशान घाट में तब्दील हो जाएगा। क्या प्रशासन और सूबे के मुख्यमंत्री किसी बड़ी मानवीय त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं?
📱 सोशल मीडिया पर विज्ञापन, जमीन पर शून्य जवाबदेही!
यदि आप महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट देखें, तो वह दिन-रात केवल एक ही राग अलापने में व्यस्त रहता है—“पीएम मोदी के नेतृत्व में यह हुआ, पीएम मोदी के नेतृत्व में वह हुआ…”। हर छोटे-बड़े काम का श्रेय लेने के लिए तो मुख्यमंत्री के पास वक्त है, लेकिन जब इसी ‘नेतृत्व’ के नीचे मुंबई की जनता की सुरक्षा दांव पर लगी हो, तो उनके पास इस गंभीर समस्या को देखने की फुरसत नहीं है।
‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल: मुख्यमंत्री जी, आखिर आप अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी को कब समझेंगे? दिनभर राजनीतिक रोटियां सेकने और केवल क्रेडिट लेने के अलावा, क्या जमीन पर तड़प रही जनता की सुरक्षा की भी कोई चिंता है आपको?
📸 कैमरे में कैद है सच, फिर क्यों मौन है पुलिस और RTO?

‘वशिष्ठ वाणी’ रोजाना उस जगह की ताजा तस्वीरें और लाइव वीडियो अपने समाचारों के माध्यम से देश के सामने रख रहा है। गाड़ियां नंबर प्लेट के साथ २४-२४ घंटे एक ही जगह पर टस से मस नहीं होतीं। इसके बावजूद मुंबई पुलिस और आरटीओ (RTO) की इस कदर चुप्पी यह साफ बयां करती है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। रसूखदारों के आगे घुटने टेक चुका यह सिस्टम पूरी तरह से पंगु हो चुका है।
⚡ वशिष्ठ वाणी का संकल्प: जब तक कार्रवाई नहीं, तब तक प्रहार जारी रहेगा!
हम इस प्रशासनिक साठगांठ और मंत्रियों की अकर्मण्यता को तब तक देश के सामने लाते रहेंगे, जब तक कांदिवली के २५ हजार नागरिकों को इस जानलेवा खतरे से मुक्ति नहीं मिल जाती। यह ‘वशिष्ठ वाणी’ का ऑन-रिकॉर्ड संकल्प है—जनता की आवाज को दबाने की कोशिश करने वाले बेलगाम अधिकारियों और कुर्सियों पर मदहोश बैठे नेताओं को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाकर ही दम लेंगे।













