मुंबई/वशिष्ठ वाणी: मुंबई के मालवाणी इलाके में MHADA की जमीन पर चल रही अवैध पार्किंग और निर्माण की समस्या अब और गंभीर हो गई है। स्थानीय निवासियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MHADA के अधिकारी रोहित शिंदे की कथित मनमानी और भ्रष्टाचार को वाइस प्रेसिडेंट संजीव जायसवाल द्वारा बार-बार अनदेखा किया जा रहा है। सामना नगर गेट नंबर 8 पर फेडरेशन द्वारा संचालित अवैध पार्किंग से हजारों परिवारों की सुरक्षा खतरे में है, लेकिन उच्चाधिकारियों की चुप्पी से सवाल उठ रहे हैं कि क्या MHADA ने अवैध गतिविधियों को रोकने का इरादा छोड़ दिया है?
अवैध पार्किंग की शुरुआत और रोहित शिंदे की भूमिका
सूत्रों के मुताबिक, मालवाणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी के अध्यक्ष बालासाहेब भगत ने फेडरेशन बनाकर MHADA की खाली जगह पर कब्जा कर लिया और अवैध पार्किंग शुरू कर दी। फेडरेशन के पदाधिकारी कई वर्षों से वाहन मालिकों से पार्किंग शुल्क वसूल रहे हैं। जब यह मामला MHADA के गोरेगांव क्षेत्रीय कार्यालय में पहुंचा, तो रोहित शिंदे ने ‘हीरो’ की तरह एंट्री ली। उन्होंने सामना नगर गेट नंबर 8 पर जाकर चेतावनी दी, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

फेडरेशन के अध्यक्ष, सचिव और सदस्यों ने रोहित शिंदे से MHADA कार्यालय में मुलाकात की, जिसके बाद पूरा खेल बदल गया। सूत्र बताते हैं कि उसके बाद से कोई MHADA अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। रोहित शिंदे को कई शिकायतें मिलीं, लेकिन उन्होंने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “रोहित शिंदे का पूरा सहयोग मिलने से फेडरेशन के अध्यक्ष का मनोबल सातवें आसमान पर है।”

फायर ब्रिगेड शिकायत और नोटिस का नाटक
मामले की गंभीरता को देखते हुए, संसद वाणी और वशिष्ठ वाणी दैनिक समाचार पत्र के स्वामी व प्रकाशक अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने बोरीवली फायर ब्रिगेड कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद रोहित शिंदे ने फिर ‘हीरोपंती’ दिखाई और फेडरेशन को नोटिस जारी किया कि 24 घंटों में सभी वाहन हटाएं, वरना कानूनी कार्रवाई होगी। लेकिन आज 12 महीने बीत चुके हैं, और न तो वाहन हटे हैं, न ही कोई कार्रवाई हुई। रोहित शिंदे ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर मामले को दबा दिया।

जब मीडिया ने MHADA के वरिष्ठ अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की, तो रोहित शिंदे ने हर बार इसे रोक दिया और फेडरेशन पदाधिकारियों को सूचित कर दिया। इससे साफ होता है कि रोहित शिंदे की मनमानी MHADA की साख पर सवाल खड़े कर रही है।
अवैध निर्माण पर आंशिक कार्रवाई और जुर्माना
कई बार खबरें चलने के बाद MHADA की टीम सामना नगर पहुंची और फेडरेशन द्वारा किए गए अवैध निर्माणों में से सिर्फ एक को ध्वस्त किया। बाकी निर्माणों को यूं ही छोड़ दिया गया। MHADA ने 1 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जब संसद वाणी और वशिष्ठ वाणी के संवाददाता ने MHADA अधिकारियों से पूछा कि अवैध निर्माण और पार्किंग पर FIR क्यों नहीं दर्ज की जाती, तो उन्होंने कहा कि वे मालवाणी पुलिस को पत्र लिखकर फेडरेशन पदाधिकारियों पर FIR दर्ज कराएंगे।
लेकिन रोहित शिंदे को यह मंजूर नहीं था। उन्होंने फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव को सूचित किया कि जल्द जुर्माना भर दें, वरना मीडिया FIR का दबाव बना रही है। फेडरेशन ने सभी नियमों को ताक पर रखकर जुर्माना भर दिया, और मामला रफा-दफा हो गया।
संजीव जायसवाल की चुप्पी: क्यों नहीं हो रही जांच?
इस पूरे प्रकरण की जानकारी MHADA वाइस प्रेसिडेंट संजीव जायसवाल को है, लेकिन रोहित शिंदे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। निवासियों का आरोप है कि संजीव जायसवाल ‘मुखदर्शक’ बने हुए हैं और रोहित शिंदे की मनमानी को अनदेखा कर रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या MHADA के सभी अधिकारी अवैध निर्माण और पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का फैसला कर चुके हैं?
एक निवासी ने कहा, “अगर उच्चाधिकारी ही चुप हैं, तो आम जनता की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा? अवैध पार्किंग से फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की पहुंच बाधित है, जो हजारों जिंदगियों को जोखिम में डाल रही है।”
मीडिया की लीगल टीम द्वारा उच्च न्यायालय या लोकायुक्त से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। मीडिया इस मामले पर नजर रखे हुए है और रोहित शिंदे, संजीव जायसवाल तथा फेडरेशन पदाधिकारियों से प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो निवासी बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
(सभी आरोप जांच के अधीन हैं। संबंधित पक्षों से प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर अपडेट किया जाएगा।)


