मुंबई: सहकारिता और प्रशासनिक व्यवस्था में जब भी निष्पक्षता और साहस के साथ काम करने की मिसाल दी जाएगी, तो म्हाडा के अधिकृत जांच अधिकारी एवं प्रमाणित लेखापरीक्षक व्ही. पी. महाजन का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। मालाड पश्चिम के सामना नगर (गेट नंबर 8, मालवणी) स्थित मालवणी स्वप्नपूर्ति को-ऑप. हाउसिंग सोसायटी के मामलों की जब जाँच करने की बारी आई, तो व्ही. पी. महाजन ने बिना किसी दबाव के अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाया।
पिछले 15 वर्षों से सोसायटी के प्रबंधन पर काबिज अध्यक्ष बालासाहेब भगत और उनके साथियों के काले कारनामों को व्ही. पी. महाजन ने अपनी 30 बिंदुओं की विस्तृत जांच रिपोर्ट के जरिए शीशे की तरह साफ कर दिया है। ‘वशिष्ठ वाणी’ ऐसे जांबाज और ईमानदार अधिकारी व्ही. पी. महाजन के कार्यों की खुले दिल से सराहना करती है।
ऑडिट और चुनाव का खेल: व्ही. पी. महाजन ने पकड़ी दोहरी भूमिका
जांच अधिकारी व्ही. पी. महाजन ने अपनी रिपोर्ट के बिंदु क्रमांक 29 में इस बात का बड़ा पर्दाफाश किया कि मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी का वैधानिक लेखापरीक्षण (ऑडिट) करने वाले श्री विष्णु कुंडलिक जाधव से ही संस्था का चुनाव भी संपन्न कराया गया। यह सहकारिता आयुक्त व निबंधक (पुणे) तथा राज्य सहकारी चुनाव प्राधिकरण के आदेशों और निर्देशों का सीधा उल्लंघन था, जिसे व्ही. पी. महाजन ने अपनी रिपोर्ट में बेबाकी से दर्ज किया है।
34 लाख के टैंकर फर्जीवाड़े पर व्ही. पी. महाजन का कड़ा प्रहार
रिपोर्ट के बिंदु क्रमांक 19 में व्ही. पी. महाजन ने पानी के टैंकर पर हुए भारी-भरकम ₹34,64,782/- (चौंतीस लाख चौसठ हजार सात सौ बयासी रुपये) के खर्च पर तीखे सवाल उठाए। जब सचिव ने पानी की कमी का हवाला दिया, तो व्ही. पी. महाजन ने स्पष्ट किया कि महानगरपालिका (BMC) से इस संबंध में कोई भी आधिकारिक पत्र-व्यवहार या ठोस सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है।
मीडिया से बातचीत में व्ही. पी. महाजन के तीखे सवाल
मीडिया से बातचीत के दौरान जांच अधिकारी व्ही. पी. महाजन ने अध्यक्ष की कार्यशैली पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सोसायटी के ऑफिस में एसी (AC) लगवाकर आम सभासदों के फंड का दुरुपयोग कर रहा हो, उसके बारे में इससे ज्यादा क्या कहा जाए! उन्होंने मीडिया के सामने यह भी सवाल उठाया कि एक ऑटो रिक्शा चालक होते हुए भी दो फ्लैटों का मालिक होना एक गंभीर विषय है और इसकी भी उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रशासनिक लीपापोती और वशिष्ठ वाणी की मांग
हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक तरफ व्ही. पी. महाजन जैसे ईमानदार अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में 30 बड़ी और गंभीर खामियां उजागर कीं, वहीं दूसरी तरफ म्हाडा उपनिबंधक बी. एस. कटरे द्वारा कथित तौर पर अध्यक्ष बालासाहेब भगत को निर्दोष साबित करने के कदम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब मीडिया ने इस विरोधाभास पर व्ही. पी. महाजन से सवाल किया, तो उनका साफ कहना था— “ऐसा होना नहीं चाहिए, अगर ऐसा हुआ है तो इसका जवाब बी. एस. कटरे ही दे सकते हैं।”
वशिष्ठ वाणी की सरकार और उच्चाधिकारियों से पुरजोर मांग है कि सिर्फ भाषणों में नहीं बल्कि असलियत में व्ही. पी. महाजन जैसे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों को बड़े और महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया जाना चाहिए, ताकि महाराष्ट्र की जनता और फ्लैट मालिकों को वास्तविक न्याय मिल सके। साथ ही, म्हाडा के उपनिबंधक बी. एस. कटरे की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो, ताकि सहकारिता के नाम पर चल रहे इस भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।














