मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मालवणी गेट नंबर 8 स्थित सामना नगर में इन दिनों आम जनता की सुरक्षा दांव पर लगी है। ‘वशिष्ठ वाणी’ की ग्राउंड रिपोर्टिंग में यह साफ देखा जा सकता है कि किस तरह एक महत्वपूर्ण आपातकालीन रास्ते (Emergency Exit) को दोनों तरफ से अवैध पार्किंग ने घेर रखा है। यह स्थिति तब है जब खुद सरकारी विभागों ने इस पर गंभीर चिंता जताई है।
विभागों में तालमेल की कमी या जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना?

- हैरानी की बात यह है कि इस समस्या को लेकर MHADA (म्हाडा) और फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बाकायदा कांदिवली ट्रैफिक विभाग को पत्र लिखकर यहाँ से वाहन हटाने का अनुरोध किया है। अग्नि विभाग का मानना है कि यदि यहाँ कोई अप्रिय घटना या आग लगने जैसी स्थिति होती है, तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का प्रवेश करना लगभग नामुमकिन होगा।

ट्रैफिक विभाग का चौंकाने वाला जवाब
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सामने आया कि कांदिवली ट्रैफिक विभाग के अधिकारी सतीश राउत ने इस मामले में कार्रवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि:
“चूंकि यह जगह म्हाडा (MHADA) के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए ट्रैफिक पुलिस यहाँ कार्रवाई नहीं कर सकती। हम केवल मुख्य सड़क पर खड़े वाहनों पर ही कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं।”
गंभीर सवाल: दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन?
अब सवाल यह उठता है कि जब जमीन का मालिक (म्हाडा) खुद लिखित रूप में पुलिस और आरटीओ (RTO) से मदद मांग रहा है, तो विभाग कार्रवाई से पीछे क्यों हट रहे हैं?
- क्या प्रशासन को यहाँ रह रहे सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है?
- क्या सतीश राउत और ट्रैफिक विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहे हैं?
- अगर कल को कोई एम्बुलेंस या अग्नि शामक दल यहाँ नहीं पहुँच पाता और जान-माल का नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—म्हाडा या कांदिवली ट्रैफिक विभाग?
निष्कर्ष:
नियमों की तकनीकी बारीकियों में उलझकर जनता की जान को खतरे में डालना प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है। ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मुद्दे पर प्रशासन से जवाबदेही की मांग करता है ताकि वक्त रहते इस रास्ते को खाली कराया जा सके और किसी भी संभावित त्रासदी को टाला जा सके।










