मुंबई (वशिष्ठ वाणी विशेष रिपोर्ट): मलाड वेस्ट स्थित चिंचोली बंदर रोड (राजन पाडा, राम नगर) पर VIBGYOR Rise CBSE School के पास अपनी खुद की बस पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन अपनी पार्किंग के लिए अलग से स्थान (Dedicated Parking Facility) की व्यवस्था करने के बजाय, स्कूल प्रशासन ने मुख्य सार्वजनिक सड़क को ही अपना ‘स्थायी पार्किंग डिपो’ बना लिया है। रोज दर्जनों बसें सड़क पर खड़ी रखकर यातायात को पूरी तरह ठप कर देती हैं।
‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार तस्वीरों और प्रमाण के साथ इस गंभीर मुद्दे को उजागर किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी गोरेगांव ट्रैफिक विभाग और बीएमसी (BMC) द्वारा कोई कार्रवाई न किया जाना कई बड़े सवाल खड़े करता है।
कानून क्या कहता है? (जनता के लिए कानूनी जानकारी)
- सीबीएसई (CBSE) और स्कूल सुरक्षा दिशानिर्देश: अदालत और शिक्षा बोर्ड के स्पष्ट नियम हैं कि किसी भी स्कूल की स्थापना के समय ही बसों के पिक-अप, ड्रॉप और पार्किंग के लिए परिसर में या निजी स्थान पर पर्याप्त जगह होना अनिवार्य है। यदि स्कूल के पास अपनी पार्किंग नहीं है, तो उसे सड़क के बाहर किसी निजी भूखंड (Private Off-Street Parking) को किराए पर लेकर बसों की पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी।
- मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act): सार्वजनिक सड़क पर किसी कमर्शियल वाहन या बस को इस तरह पार्क करना जिससे यातायात प्रभावित हो, कानूनन दंडनीय अपराध है। ट्रैफिक पुलिस को ऐसी गाड़ियों को तुरंत जब्त (Tow) करने और भारी जुर्माना लगाने का अधिकार है।
- बीएमसी डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन्स (DCR Rules): किसी भी कमर्शियल इमारत या स्कूल को बीएमसी द्वारा अनुमति तभी मिलती है जब उनके पास तय मानक के अनुसार पार्किंग स्पेस हो। पार्किंग स्पेस के बिना सड़क का व्यावसायिक उपयोग करना अवैध कब्जा माना जाता है, जिस पर बीएमसी के प्रवर्तन विभाग को जब्ती की कार्रवाई करनी चाहिए।
सीधे और तीखे सवाल: कानून का पालन क्यों नहीं हो रहा?
- अलग पार्किंग व्यवस्था क्यों नहीं? जब कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि बसों को सड़क पर खड़ा नहीं किया जा सकता, तो स्कूल प्रशासन अलग से निजी पार्किंग स्थल की व्यवस्था क्यों नहीं कर रहा? सार्वजनिक सड़क को निजी डिपो की तरह इस्तेमाल करने की छूट इन्हें कैसे मिली हुई है?
- गोरेगांव ट्रैफिक विभाग की मिलीभगत का शक: जिस सड़क पर आम जनता का वाहन खड़ा होने पर क्रेन तुरंत एक्शन लेती है, उसी सड़क पर नियम तोड़कर खड़ी विशालकाय स्कूल बसों पर गोरेगांव ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई क्यों रुक जाती है? क्या यह गोरेगांव ट्रैफिक विभाग की सीधी मिलीभगत नहीं है?
- बीएमसी (P-North Ward) की लापरवाही: नियमों का उल्लंघन कर सड़क पर हो रहे इस अवैध कब्जे पर बीएमसी का इंफोर्समेंट विभाग चुप क्यों है? क्या बीएमसी की जिम्मेदारी सिर्फ अनुमति देना है, नियमों का पालन कराना नहीं?
बीएमसी और ट्रैफिक विभाग को सीधा अल्टीमेटम
सार्वजनिक सड़क पर बसों का अवैध कब्जा जमाना और दैनिक यातायात को बाधित करना सीधे तौर पर आम नागरिकों के अधिकारों पर डाका डालना है।
यदि गोरेगांव ट्रैफिक विभाग और बीएमसी (P-North Ward) तुरंत चिंचोली बंदर रोड से इन बसों का जमावड़ा हटाकर कड़ा एक्शन नहीं लेते और स्कूल प्रशासन को अपनी अलग पार्किंग व्यवस्था करने का कानूनी निर्देश जारी नहीं करते, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ इस पूरी मिलीभगत के खिलाफ अदालत (Court Summons) के जरिए कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।











