विशेष एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट | मुंबई
मालाड (पश्चिम) स्थित ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सहकार गृहनिर्माण संस्था फेडरेशन’ के नाम पर चल रहे अवैध कारोबार और 15 साल की अंधेरगर्दी के खिलाफ वशिष्ठ मीडिया की एक और ऐतिहासिक जीत दर्ज हुई है। विश्वस्त सहकारिता और अंदरूनी सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट (दिंडोशी) द्वारा दीवानी मुकदमे में समन जारी होते ही कानूनी शिकंजे से घबराकर फेडरेशन के अध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारियों ने अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।
कानूनी पेंच में फंसते देख अध्यक्ष व कमेटी ने पद से लिया किनारा
सूत्रों का कहना है कि कुछ सोसाइटियां केस लड़ने के लिए फंड देने को तैयार भी थीं, लेकिन जैसे ही पदाधिकारियों ने देखा कि वे म्हाडा की कार्रवाइयों और अदालत के कड़े कानूनी पेंच में पूरी तरह घिर चुके हैं, तो उन्होंने तुरंत इस्तीफा देने में ही अपनी भलाई समझी।
वशिष्ठ मीडिया की लीगल टीम के एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा जी का बड़ा बयान
शिकायतकर्ता पक्ष यानी वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड की लीगल टीम के मुख्य वकील एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा जी ने इसे सत्य और सहकारिता कानून की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि “पदाधिकारियों का इस्तीफा देना उनके गुनाहों की कबूली है। पद छोड़ने से इनके आपराधिक और वित्तीय दायित्व खत्म नहीं हो जाते। आने वाली 29 अगस्त की सुनवाई में इन सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष एक-एक कारगुजारी का जवाब देना ही पड़ेगा।”
29 अगस्त को अदालत में इन महा-सवालों का देना होगा हिसाब:
वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड की लीगल टीम के एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा जी के अनुसार, आगामी सुनवाई में विरोधियों को निम्नलिखित गंभीर बिंदुओं का जवाब देना होगा:
- 35 लाख का टैंकर घोटाला: म्हाडा की वैधानिक जांच (महाजन रिपोर्ट) में दर्ज ₹35,64,782/- के पानी के फर्जी खर्च का हिसाब।
- अवैध पार्किंग की वसूली: म्हाडा के आपातकालीन रास्ते पर अवैध कब्जा करके वसूले गए पैसों का पाई-पाई हिसाब।
- ध्वस्त अवैध निर्माण: म्हाडा द्वारा चलाए गए बुलडोजर और ठोकी गई ₹1.08 लाख की पेनल्टी का जवाब।
- ऑडिट और चुनाव में धांधली: वैधानिक ऑडिटर से ही नियम विरुद्ध चुनाव संपन्न कराने का हिसाब।
- 300 किग्रा का खतरनाक बोर्ड व फंड: मेन गेट पर टांगे गए 300 किलो के भारी-भरकम बोर्ड पर ‘सामना नगर मित्र मंडल’ लिखे होने का कारण और उस मंडल में आने वाले फंड के स्रोत (Source of Income) का हिसाब।
- सोसायटी के फंड की डकैती: पिछले 15 सालों से पद पर काबिज रहने के बाद सोसायटी के बैंक खातों को खाली कर मात्र ₹22,000/- छोड़े जाने का हिसाब।
निष्कर्ष: वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड की लीगल टीम और एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा जी की इस रणनीतिक जीत के बाद अब म्हाडा व सहकारिता विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड पर यह सामूहिक इस्तीफा दर्ज होते ही, 29 अगस्त को होने वाली कोर्ट सुनवाई में इन सभी आरोपियों को अदालत के कटघरे में खड़े होकर अपनी हर एक वित्तीय अनियमितता का हिसाब देना होगा।










