मुंबई: कांदिवली वेस्ट स्थित भूमि पार्क रोड (छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर) का नजारा अब शहर की प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर एक गंभीर बदनुमा दाग बन चुका है। सड़क पर एक निजी गैस एजेंसी द्वारा एलपीजी सिलेंडरों और व्यावसायिक वाहनों का खुलेआम अवैध जमावड़ा लगाकर पूरी मुख्य सड़क को एक निजी गोदाम में तब्दील कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि ये गैस से भरे और खाली वाहन वहाँ 24 घंटे लगातार खड़े रहते हैं, और पिछले 10 महीनों से लगातार शिकायतें करने के बावजूद प्रशासनिक महकमा आंखें मूंदे कुंभकर्णी नींद सो रहा है!
प्रमुख बिंदु: कार्रवाई के नाम पर शून्य, कागजी दावों पर उठे गंभीर सवाल
- कांदिवली ट्रैफिक विभाग का मौन: यदि कांदिवली ट्रैफिक विभाग यह दावा करता है कि उसने अवैध पार्किंग के खिलाफ लगातार चालान काटे हैं, तो फिर उसका लिखित प्रमाण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? क्या यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति है?
- बीएमसी की शर्मनाक ढिलाई: फुटपाथ और मुख्य सड़कों से अतिक्रमण हटाने के बड़े-बड़े दावे करने वाली बीएमसी की गाड़ियां इस सड़क पर आकर कार्रवाई करने से क्यों कतराती हैं?
- जानलेवा सुरक्षा खतरा और चारकोप पुलिस की चुप्पी: गणेशोत्सव के दौरान और उसके बाद से न जाने कितने लोगों ने यहाँ पटाखे फोड़े होंगे, लेकिन इतनी संवेदनशील और घनी आबादी वाले इलाके में गैस सिलेंडरों के खुले ढेर पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी? सिलेंडरों का इस तरह 24 घंटे खुले में पड़े रहना किसी भी वक्त एक भीषण अग्निकांड को न्योता दे रहा है, फिर भी चारकोप पुलिस स्टेशन और ट्रैफिक विभाग द्वारा कोई सुरक्षात्मक कदम क्यों नहीं उठाया गया?
आम नागरिक पर क्रेन, गैस एजेंसी पर मेहरबानी?
स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। जनता पूछ रही है कि यदि आम नागरिक का वाहन दो मिनट के लिए भी गलत जगह खड़ा हो जाए, तो ट्रैफिक पुलिस तुरंत क्रेन लेकर पहुंच जाती है और जुर्माना वसूलती है। वहीं दूसरी ओर, पूरी मुख्य सड़क को गैस सिलेंडरों का 24 घंटे चलने वाला गोदाम बना दिए जाने के बावजूद न तो गाड़ियां जब्त की जा रही हैं और न ही सिलेंडर!
‘वशिष्ठ वाणी’ की तीखी पड़ताल: दलालों की मलाई और बिक चुके जमीर का खेल
स्थानीय नागरिक का दर्द:
“गाड़ियाँ निकलने के लिए रास्ता तक नहीं बचता है और चारों तरफ 24 घंटे सिलेंडर रखे होने से हर वक्त बड़े हादसे का डर रहता है। हम पिछले 10 महीने से लगातार शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है!”
जब मीडिया इस पूरे खेल की तह तक जाती है, तो एक ही कड़वा सच सामने आता है—इन अधिकारियों को जनता की जान-माल के जोखिम से कोई सरोकार नहीं है। कांदिवली ट्रैफिक विभाग, बीएमसी और चारकोप पुलिस के इन भ्रष्ट अधिकारियों को शायद मीडिया के तीखे कटाक्ष से ज्यादा भारत गैस एजेंसी के मालिक की तरफ से मिलने वाली ‘मलाई’ ज्यादा प्यारी लगती है! जनता अब खुलेआम सवाल पूछ रही है— “दलालों और अवैध कारोबारियों की इस मलाई के आगे क्या इन जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने जमीर को पूरी तरह बेच खाया है, जो आम जनता की जिंदगियों को दांव पर लगाने से भी एक पल नहीं हिचकिचाते?”
कानूनी कार्रवाई और अंतिम चेतावनी
प्रशासनिक बेरुखी की सभी हदें पार हो चुकी हैं। यदि जल्द ही इस सड़क से अवैध कब्जा हटाकर गैस सिलेंडरों और व्यावसायिक वाहनों को जब्त नहीं किया गया, तो इस मामले को सीधे अदालत (Court Summons) में घसीटा जाएगा। इसके बाद किसी भी संभावित दुर्घटना या जन-धन के नुकसान की संपूर्ण जवाबदेही बीएमसी, कांदिवली ट्रैफिक विभाग और चारकोप पुलिस प्रशासन के इन लापरवाह अधिकारियों की होगी!









