क्या इन तीनों विभागों के ‘मिलीभगत’ का इंतज़ार है किसी बड़े हादसे का? वशिष्ठ वाणी का सीधा सवाल—आखिर किसके दबाव में सड़क पर चल रहा है भारत गैस का अवैध गोदाम?
मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) के एकता नगर स्थित छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर का मंजर यह बताने के लिए काफी है कि मुंबई में कानून सिर्फ आम आदमी के लिए है। वर्षों से सरेआम सड़क पर भारत गैस के सिलेंडर से लदे वाहनों का जमावड़ा यह चीख-चीख कर कह रहा है कि कांदिवली की सड़कों पर अब ‘सिस्टम’ का नहीं, बल्कि ‘मिलीभगत’ का राज चल रहा है।
प्रशासन का रटा-रटाया झूठ: “हम तो चालान काट रहे हैं”
जब इस जानलेवा लापरवाही पर ट्रैफिक विभाग से सवाल पूछा जाता है, तो उनका जवाब होता है—“हम तो चालान काट रहे हैं।”
‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा और तल्ख सवाल:
- BMC, पुलिस और RTO से हमारा सवाल है: क्या चालान काटना अब अवैध कब्जे और कानून की धज्जियां उड़ाने का ‘लाइसेंस’ बन चुका है?
- अगर रोजाना चालान कट रहा है, तो फिर ये गाड़ियाँ वहां से हट क्यों नहीं रही? क्या चालान की वसूली का मतलब सड़क को ‘निजी गोदाम’ में तब्दील कर देना है?
- क्या कांदिवली के इन तीनों विभागों के पास उस गैस एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है, या फिर यह ‘अवैध कमाई’ का एक सोची-समझी साजिश है?
बहरी व्यवस्था और लाचार पत्रकारिता
एक पत्रकार होने के नाते, हमारी कलम और हमारा अखबार लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है। लेकिन, सिस्टम का रवैया यह है कि जब तक ऊपर से किसी मंत्री या बड़े नेता का फोन नहीं आता, तब तक ये अधिकारी अपनी कुर्सी से हिलना गवारा नहीं समझते। हर बार कोर्ट के चक्कर काटना एक स्वतंत्र समाचार पत्र की सीमा से बाहर है। हमारे पास न तो डोनेशन का पैसा है और न ही सत्ता की शह—सिर्फ सच लिखने का साहस है।
लेकिन क्या इस भ्रष्ट तंत्र ने यह मान लिया है कि मीडिया की कलम का कोई मोल नहीं है?
जनता से अपील: कब जागेगा आपका जमीर?
अधिकारी यह अच्छी तरह जानते हैं कि जनता आज बंटी हुई है। वे जानते हैं कि जब तक कोई बड़ी अनहोनी नहीं होगी, तब तक सवाल नहीं उठेंगे। अगर कांदिवली की जनता ने आज इन भ्रष्ट अधिकारियों की चुप्पी के खिलाफ आवाज नहीं उठाई, तो कल किसी भी हादसे की जिम्मेदारी इन विभागों के साथ-साथ हमारी आपकी भी होगी।
‘वशिष्ठ वाणी’ की चेतावनी: बीएमसी, पुलिस और ट्रैफिक विभाग—कान खोलकर सुन लें! यह सड़क किसी की निजी संपत्ति नहीं है। हम सबूतों के साथ कह रहे हैं कि सड़क पर अवैध गोदाम चल रहा है। यदि तत्काल इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ इन विभागों की मिलीभगत का एक-एक पन्ना जनता के सामने खोलेगा।
क्या इन विभागों के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझेंगे, या अब उन्हें कानून की भाषा में ही जवाब देना होगा?












