विशेष संवाददाता, वशिष्ठ वाणी (मुंबई): मालवणी पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR No. 1584/2026 और BNS 118(1) जैसी गंभीर, गैर-जमानती धारा के मामले में अब रोजाना नए सवाल उठ रहे हैं। वशिष्ठ वाणी द्वारा लगातार खुलासा किए जाने के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस प्रशासन ‘टेक्निकल सोच’ का राग अलाप रहा है।
- पीड़िता जब भी न्याय की आस लेकर चौकी पहुँचती है, उन्हें केवल यही जवाब मिलता है कि “हम टेक्निकल सोचेंगे।”
- आज वशिष्ठ वाणी सीधे मालवणी पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी रानीपुरी और DCP Zone 11 से यह यक्ष प्रश्न पूछता है:
1. सीनियर PI रानीपुरी जी… क्या ‘टेक्निकल सोच’ में 1 से 2 साल का वक्त लगेगा?
कानून की किताब में संज्ञेय और गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध दर्ज होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी का स्पष्ट प्रावधान है। रानीपुरी जी जवाब दें कि आखिर यह कौन सा ‘टेक्निकल एनालिसिस’ चल रहा है जिसे पूरा होने में हफ्ते बीत गए? क्या यह सोच 1 साल चलेगी या 2 साल? क्या पीड़िता तब तक आरोपियों के खौफ में जीती रहे?
2. क्या मालवणी पुलिस अब देश के संविधान से ऊपर होकर खुद का कानून बनाने लगी है?
जब BNS की धारा 118(1) के तहत आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए, तब उसे महज एक ‘नोटिस’ थमाकर छोड़ देना किस पुलिस मैनुअल का हिस्सा है? क्या मालवणी पुलिस चौकी के पास अपना खुद का कोई नया नियम-कानून बन चुका है, जिसके आधार पर गैर-जमानती मामलों में भी आरोपियों को अभयदान दिया जा रहा है?
3. DCP साहब… आपकी चुप्पी का क्या मतलब निकाला जाए?
मामला केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित नहीं है। DCP Zone 11 के प्रशासनिक क्षेत्र में आने वाले मालवणी पुलिस थाने में जब इस तरह की खुली लीपापोती चल रही हो, तो DCP साहब का मौन धारण करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या DCP साहब दबते हुए मामले को देखकर भी अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं? या फिर मातहत अधिकारियों की इस मनमानी को उच्च स्तर से मौन सहमति मिली हुई है?











