मुंबई/वशिष्ठ वाणी: सामना नगर मालवणी गेट नंबर 8 पर नियमों के साथ खिलवाड़ का एक नया और चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। स्थानीय फेडरेशन के अध्यक्ष पर आरोप है कि MHADA का नोटिस मिलने के बाद उन्होंने चालाकी दिखाते हुए पार्किंग के लिए पैसे (Rashi) लेना तो बंद कर दिया है, लेकिन अवैध पार्किंग को पूरी तरह से संरक्षण दे रखा है। यह साफ तौर पर अधिकारियों को गुमराह करने और नियमों की धज्जियां उड़ाने की कोशिश है।
दिखावे की ईमानदारी, हकीकत में तानाशाही
निवासियों का कहना है कि MHADA और फायर ब्रिगेड की कार्रवाई से बचने के लिए अध्यक्ष ने ‘नो पार्किंग’ का बोर्ड लगा दिया और रसीद काटना बंद कर दिया, ताकि कागजों पर सब कुछ सही दिखे। लेकिन हकीकत में सामना नगर का परिसर आज भी अवैध पार्किंग का अड्डा बना हुआ है। अध्यक्ष के इस दोहरे चरित्र के कारण आम नागरिकों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है और पूरा परिसर खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
प्रशासन को ठेंगा: आखिर कार्रवाई से क्यों बच रहा है अध्यक्ष?
बता दें कि 18 दिसंबर 2024 को फायर ब्रिगेड और 13 फरवरी 2025 को कांदिवली ट्रैफिक विभाग व म्हाडा को लिखित आदेश दिए गए थे। म्हाडा के अधिकारी संतोष कांबले के संरक्षण की खबरें पहले भी चर्चा में रही हैं, और अब अध्यक्ष का यह नया पैंतरा प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल उठाता है। क्या कांदिवली ट्रैफिक विभाग को यह नजर नहीं आता कि बोर्ड लगने के बावजूद गाड़ियां वहीं की वहीं खड़ी हैं?

लेकिन म्हाडा अधिकारी संतोष कांबले ने जनसुरक्षा के इस गंभीर दस्तावेज को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है।
अग्नि सुरक्षा से समझौता: किसी बड़े हादसे की आहट!
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बिना पैसे लिए भी अगर गाड़ियां वहीं खड़ी हैं, तो फायर सेफ्टी का खतरा कम नहीं हुआ है। यदि सामना नगर में कोई आग लगती है, तो संकरी गलियों में फंसी ये गाड़ियां मौत का कारण बन सकती हैं। निवासियों का आरोप है कि अध्यक्ष सिर्फ अपनी जिद और कुछ चहेतों को फायदा पहुँचाने के लिए पूरे सामना नगर की सुरक्षा को दांव पर लगा रहे हैं।
जनता का आक्रोश: “अध्यक्ष ने पैसे लेना बंद करके खुद को पाक-साफ दिखाने की कोशिश की है, लेकिन सवाल पार्किंग कराने का है, पैसे का नहीं। क्या प्रशासन इस ‘सफेद झूठ’ को नहीं देख पा रहा?”













