नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाक़ात के बाद चुनाव आयोग पर तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने “ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त” कभी नहीं देखा और आयोग अब बीजेपी के IT सेल जैसा कार्य कर रहा है।

बनर्जी ने आयोग पर यह भी आरोप लगाया कि:

  • चुनाव आयोग लोकतंत्र के मूल उद्देश्यों से भटक गया है।
  • यह मौजूदा SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को बीजेपी के हित में इस्तेमाल कर रहा है।
  • बंगाल को अन्य राज्यों की तुलना में गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है

उन्होंने कहा, “मैं आपकी कुर्सी का सम्मान करती हूं, क्योंकि कोई भी कुर्सी हमेशा के लिए नहीं रहती — एक दिन आपको जाना ही होगा…” और यह सवाल उठाया कि बंगाल को विशेष रूप से क्यों टार्गेट किया जा रहा है।


SIR विवाद: मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी और निष्पक्षता पर सवाल

ममता बनर्जी का कहना है कि SIR अभ्यास के दौरान बंगाल में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए या उन्हें गैर-उपस्थिति का दर्जा दे दिया गया है। वह इसे निष्पक्ष प्रक्रिया के खिलाफ मनगढ़ंत निर्णय बता रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित हुए हैं।

उनके आरोपों के मुख्य बिंदु:

  • SIR प्रक्रिया भ्रामक और अचानक लागू की गई।
  • आयोग बीजेपी के हित के अनुरूप IT उपकरणों और मोबाइल ऐप्स का प्रयोग कर रहा है
  • कई लोगों को सही जानकारी के बिना नाम हटाने या ‘डेड’ घोषित करने जैसे बतौर गलती का सामना करना पड़ा।

राजनीतिक टकराव और आगे की रणनीति

मुलाक़ात के बाद:

  • ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की है, जिसमें SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के निर्देशों को चुनौती दी गई है।
  • उन्होंने आयोग और CEC पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है और केंद्रीय राजनीतिक एजेंसियों के दुरुपयोग को भी मुद्दा बनाया है।
  • यह विवाद आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के सन्निकटन में और अधिक प्रबल हो गया है।

मुलाक़ात के बाद बढ़ते तनाव ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है, और टीएमसी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं।


राजनीतिक पृष्ठभूमि और केंद्रीय आरोप-प्रत्यारोप

यह विवाद SIR प्रक्रिया (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) से जुड़ा है, जिस पर टीएमसी ने पहले भी कठोर आलोचना की है। ममता ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हेराफेरी की कोशिश बताया है और कहा है कि इससे मतदाता अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है।

वहीं, विपक्ष और केंद्र की भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को राजनीतिक बयानबाज़ी करार दिया है और कहा है कि ऐसे बयान निर्वाचन प्रक्रिया पर जनता का विश्वास प्रभावित कर सकते हैं।


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