मुंबई | वशिष्ठ वाणी | विशेष रिपोर्ट
मुंबई के जनकल्याण नगर, मलाड वेस्ट में स्थित Dotom Group का एक प्रोजेक्ट अब कानूनी पचड़े में फंसता नजर आ रहा है। एक ग्राहक द्वारा दो फ्लैट्स की बुकिंग के लिए जमा की गई ₹6 लाख की राशि को बिल्डर द्वारा वापस न करने का मामला सामने आया है।
क्या है मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित ग्राहक ने इस प्रोजेक्ट में दो फ्लैट बुक किए थे और इसके लिए कुल ₹6 लाख रुपये का भुगतान किया था। हालांकि, किसी कारणवश जब ग्राहक ने बुकिंग रद्द कर अपनी राशि वापस मांगी, तो Dotom Group के सेल्स मैनेजर ने “No Refund Policy” का हवाला देकर पूरी राशि लौटाने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
कानूनी कार्रवाई की शुरुआत
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, ग्राहक ने वशिष्ठ मीडिया हाउस प्रा. लि. के लीगल सलाहकार अधिवक्ता ओम प्रकाश मिश्रा के माध्यम से Dotom Group को एक कड़ा विधिक नोटिस भेजा है। नोटिस में बिल्डर को 15 दिनों का समय दिया गया है।
नोटिस की मुख्य बातें:
- 15 दिनों की मोहलत: यदि निर्धारित समय के भीतर ₹6 लाख की राशि वापस नहीं की जाती, तो मामला Maharashtra Real Estate Regulatory Authority (MAHARERA) और माननीय उच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा।
- 18% ब्याज का दावा: नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि मामला कोर्ट तक पहुंचता है, तो बिल्डर को पूरी राशि पर 18% वार्षिक ब्याज देना होगा।
प्रशासनिक और नैतिक सवाल
अब सवाल यह उठता है कि जब बिल्डर उस फ्लैट को किसी अन्य ग्राहक को दोबारा बेच सकता है, तो पुराने ग्राहक की मेहनत की कमाई को रोकना कहाँ तक उचित है? क्या “नो रिफंड पॉलिसी” का बहाना बनाकर ग्राहकों के अधिकारों का हनन किया जा सकता है?
फिलहाल, सबकी नजरें Dotom Group के जवाब पर टिकी हैं। क्या कंपनी कानूनी लड़ाई से बचने के लिए राशि वापस करेगी या यह मामला अदालत की दहलीज तक पहुंचेगा?











