लोकप्रिय विषयमहाराष्ट्रसम्पादकीयकवितास्वास्थ्यअपराधअन्यवीडियो

वशिष्ठ मीडिया हाउस के आगे झुका डोटम (Dotom) बिल्डर, वापस करना पड़ा ग्राहक का 6 लाख का टोकन अमाउंट!

मुंबई: आम जनता के हक और इंसाफ के लिए सदैव तत्पर रहने वाले वशिष्ठ वाणी और संसद वाणी न्यूज़ ग्रुप की ताकत के आगे एक बार फिर एक बड़े बिल्डर को घुटने टेकने पड़े हैं। मामला डोटम (Dotom) बिल्डर का है, जहां एक पीड़ित ग्राहक के हक की आवाज उठाते ही बिल्डर प्रबंधन बैकफुट पर आ गया और आनन-फानन में 6 लाख रुपये का रिफंड चेक पीड़ित को सौंपना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

जनकल्याण नगर (कांदिवली, मालाड वेस्ट) में डोटम (Dotom) बिल्डर द्वारा एक बड़े प्रोजेक्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसी प्रोजेक्ट में एक सजग ग्राहक ने फ्लैट बुकिंग के लिए 6 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि टोकन अमाउंट के रूप में दी थी। हालांकि, किन्हीं अपरिहार्य कारणों से ग्राहक को वह बुकिंग कैंसिल करनी पड़ी।

जब पीड़ित ग्राहक ने नियमानुसार अपना टोकन अमाउंट वापस मांगा, तो डोटम बिल्डर के सेल्स मैनेजर ने अपनी मनमानी दिखाते हुए और तथाकथित ‘नो रिफंड पॉलिसी’ (No Refund Policy) का हवाला देकर पैसे वापस करने से साफ मना कर दिया।

जब वशिष्ठ मीडिया हाउस ने खोला मोर्चा

सेल्स मैनेजर की इस तानाशाही के बाद पीड़ित ने अपनी शिकायत लेकर देश की बुलंद आवाज वशिष्ठ मीडिया हाउस का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मीडिया हाउस की टीम ने तुरंत डोटम बिल्डर के इस तानाशाही रवैये के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

कानून की ताकत और निष्पक्ष पत्रकारिता का असर ऐसा हुआ कि विवाद को बढ़ता देख डोटम बिल्डर के डायरेक्टर को खुद सामने आना पड़ा। उन्होंने तत्काल प्रभाव से अपनी कथित रिफंड पॉलिसी को दरकिनार करते हुए पीड़ित ग्राहक को 6 लाख रुपये का चेक वापस सौंप दिया।


बड़ा सवाल: क्या रेरा (RERA) से भी ऊपर हैं बिल्डरों के अपने नियम?

इस पूरे मामले ने बिल्डर लॉबी की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • मनमाने नियम किसने बनाए? जब देश और राज्य में RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) के स्पष्ट नियम मौजूद हैं कि यदि कोई ग्राहक बुकिंग कैंसिल करता है, तो तय प्रक्रिया के तहत उसकी राशि वापस होनी चाहिए, तो फिर ये बिल्डर अपनी ‘नो रिफंड पॉलिसी’ कैसे चला सकते हैं?
  • जो आवाज नहीं उठा पाते, उनका क्या? आज वशिष्ठ मीडिया हाउस ने मजबूती से आवाज उठाई, तो बिल्डर ने डरकर पैसे वापस कर दिए। लेकिन उन मासूम और सीधे-साधे ग्राहकों का क्या होता होगा, जो इस तानाशाही के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाते? क्या उनका पैसा डकार जाना ही इन बिल्डरों का व्यापार बन चुका है?

खुद को कानून से ऊपर समझने वाले ऐसे बिल्डरों को यह साफ समझ लेना चाहिए कि जनता की गाढ़ी कमाई पर इस तरह डाका नहीं डाला जा सकता।


वशिष्ठ वाणी और संसद वाणी: आपकी आवाज, आपका भरोसा

वशिष्ठ वाणी और संसद वाणी न्यूज़ ग्रुप केवल खबरें छापता नहीं है, बल्कि समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक ढाल बनकर खड़ा रहता है। हम आम जनता की वो बुलंद आवाज हैं जो भ्रष्ट अधिकारियों, मनमाने बिल्डरों और तानाशाही व्यवस्था की आंखों में आंखें डालकर सच बोलने का हौसला रखती है।

“अगर आपके साथ भी कहीं कोई अन्याय, धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार हो रहा है, तो डरिए मत। तुरंत वशिष्ठ मीडिया हाउस से संपर्क करें। हम आपकी आवाज बनेंगे, आपके हक की लड़ाई लड़ेंगे और न्याय दिलाकर ही दम लेंगे।”

जहाँ भी गलत होगा, वशिष्ठ वाणी और संसद वाणी इसी तरह पूरी ताकत के साथ जनता के साथ खड़ी रहेगी और अपनी पैनी पत्रकारिता से सच को सामने लाती रहेगी।

Join WhatsApp

Join Now

और पढ़ें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी, जवाब दीजिए! क्या मालाड न्यू लिंक रोड को शोरूम्स और होटलों के हवाले गिरवी रख दिया गया है?

खाकी की खामोशी और BMC की बेबसी: ‘ग्रीन्स रेस्टोरेंट’ में रात 2:30 बजे तक सर्विस जारी, क्या बांगुर नगर पुलिस की ‘सेटिंग’ से टूट रहे नियम?

खाकी की मेहरबानी या कानून को खुली चुनौती? बांगुर नगर पुलिस की नाक के नीचे रात 3 बजे तक धड़ल्ले से चल रहा ‘Platinum Bar and Restaurant’

जासूसों की खोज जारी: म्हाडा अधिकारी संतोष कांबले और रोहित शिंदे का ‘अदृश्य लेटर’! 8 महीने से टालमटोल, आपातकालीन रास्ते पर मंडराता खतरा!

‘फेंकू’ बीएमसी अधिकारियों का कारनामा: आज 14 अक्टूबर है, हालात फिर जस के तस! प्रवीण वाघेला के ‘प्रतिदिन कार्रवाई’ के दावे निकले सरासर झूठे

क्लाउडनाइन हॉस्पिटल ने तोड़ी दीवार, 350+ परिवार बने बंधक; क्या BMC की है मिलीभगत?

Leave a Comment