कांदिवली (मुंबई): क्या कांदिवली ट्रैफिक विभाग किसी बड़े धमाके का इंतज़ार कर रहा है? ‘वशिष्ठ वाणी’ की ग्राउंड रिपोर्ट में आज एक ऐसी हकीकत सामने आई है जो इलाके के हजारों लोगों की जान को खतरे में डाल रही है। एक तरफ सकरी सड़कें और दूसरी तरफ गैस सिलेंडरों से लदे वाहनों का अवैध जमावड़ा।
सतीश राउत से ‘वशिष्ठ वाणी’ के सीधे सवाल:
इस रिपोर्टिंग के जरिए वशिष्ठ वाणी सीधे तौर पर कांदिवली ट्रैफिक विभाग के अधिकारी सतीश राउत से कुछ कड़े सवाल पूछती है:
- अनुमति किसकी?: रिहायशी इलाके में, जहाँ लोग रहते हैं, वहां गैस सिलेंडर से भरी गाड़ियों को खड़ा करने की अनुमति किसने दी?
- सड़क पर वितरण: क्या नियम यह कहते हैं कि बीच सड़क पर ही सिलेंडरों की लोडिंग-अनलोडिंग और बिक्री की जाए? क्या यह ट्रैफिक नियमों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन नहीं है?
- सुरक्षा से खिलवाड़: गैस सिलेंडर एक संवेदनशील सामग्री है। क्या इनके लिए कोई सुरक्षित या सुनसान जगह (Safe Zone) तय नहीं होनी चाहिए?
- कार्रवाई से दूरी क्यों?: जब आम जनता की जान जोखिम में है, तब सतीश राउत का मौन क्या दर्शाता है? क्या उनका ‘मन’ नियमों से भी ऊपर हो गया है कि वह सब कुछ देखकर भी कार्रवाई नहीं कर रहे?
खतरे की घंटी
सिलेंडर की इन गाड़ियों के पास अगर छोटी सी भी चिंगारी पहुंचती है, तो पूरे इलाके में भारी तबाही मच सकती है। इसके बावजूद, सड़क पर खुलेआम सिलेंडर बांटे जा रहे हैं और गाड़ियां घंटों खड़ी रहती हैं।
निष्कर्ष:
प्रशासन की यह चुप्पी संदिग्ध है। वशिष्ठ वाणी यह मांग करती है कि इन गाड़ियों को तुरंत रिहायशी इलाकों से हटाया जाए और सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। यदि कोई अनहोनी होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी सतीश राउत और उनके विभाग की होगी।










